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तेलंगाना के मुख्यमंत्री को भाजपा का जवाब, 'परिसीमन के नाम पर डर फैलाना बंद करो'

तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के उस बयान पर पलटवार किया है

तेलंगाना के मुख्यमंत्री को भाजपा का जवाब, परिसीमन के नाम पर डर फैलाना बंद करो
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हैदराबाद। तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के उस बयान पर पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने परिसीमन के विरोध में दक्षिण भारत के राज्यों को एकजुट करने का आह्वान किया है। तेलंगाना भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री रेड्डी की चिट्ठी को रीपोस्ट करते हुए लिखा कि परिसीमन के नाम पर भय फैलाना बंद करें।

तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि भय फैलाना बंद करो—संविधान का अनुच्छेद 81 पढ़ो। अनुच्छेद 81 में 'जहां तक संभव हो' वाक्यांश का प्रयोग किया गया है। इसका अर्थ है कि परिसीमन केवल जनसंख्या पर आधारित नहीं है; यह अन्य प्रासंगिक कारकों के लिए भी गुंजाइश छोड़ता है जिन्हें परिसीमन आयोग ध्यान में रख सकता है।

उन्होंने कहा कि सीटों की संख्या बढ़ाने का सूत्र परिसीमन आयोग पर छोड़ दिया गया है, फिर भी आप बेवजह राजनीति खेल रहे हैं। शर्मनाक।

दरअसल, मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को अन्य दक्षिणी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्यमंत्री से लोकसभा सीटों में 'आनुपातिक अनुपात मॉडल' लागू करने के केंद्र के प्रयासों का एकजुट होकर विरोध करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह कदम दक्षिणी राज्यों के हितों के लिए अत्यधिक हानिकारक और प्रतिकूल होगा।

रेवंत रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी को अलग-अलग पत्र लिखकर आनुपातिक अनुपात पद्धति से लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्तावित कदम पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इसके दक्षिणी राज्यों और देश के संघीय संतुलन पर दूरगामी प्रभाव होंगे।

उन्होंने दक्षिणी राज्यों और सभी समान विचारधारा वाले राज्यों के बीच सामूहिक भागीदारी की बढ़ती आवश्यकता पर बल दिया, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर हमारी चिंताओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त किया जा सके।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण, राष्ट्रीय परिसीमन और लोकसभा सीटों में वृद्धि तीन अलग-अलग मुद्दे हैं, जिन्हें जानबूझकर जनता के मन में भ्रम पैदा करने के लिए मिलाया जा रहा है।

कांग्रेस नेता ने लिखा कि जो लोग महिला आरक्षण विधेयक (सीटों में वृद्धि से जोड़े बिना) या परिसीमन का समर्थन कर रहे हैं, वे केवल राज्यों के भीतर विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को बदलना चाहते हैं।

रेवंत रेड्डी ने कहा कि असली विवादित मुद्दा आनुपातिक आधार पर लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। हम आनुपातिक विधि से सीटों में वृद्धि का पूरी तरह से विरोध करेंगे और करना ही चाहिए। उन्होंने आनुपातिक मॉडल के अंतर्निहित गणित और राज्यों के बीच राजनीतिक शक्ति के अंतर में होने वाले परिवर्तन को भी समझाया


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