बारदाना की कमी से धान खरीदी बंद
अन्तागढ़ ! अन्तागढ़ मंडी में बारदाना नहीं होने से क्षेत्र के किसान परेशान, आज धान खरीदी बन्द, मण्डी में अभी भी जमे हुए हैं।

अन्तागढ़ ! अन्तागढ़ मंडी में बारदाना नहीं होने से क्षेत्र के किसान परेशान, आज धान खरीदी बन्द, मण्डी में अभी भी जमे हुए हैं। एक सौ से ज्यादा कृषक 11 दिनों से इस कड़ाके की ठण्ड में खुले आसमान के नीचे कर रहे हैं 11 दिनों से अपनी बारी का इन्तजार धान बोरी की चार दिवारी व अलाव के सहारे कर रहे हैं ठण्ड से बचाव।
ज्ञात हो कि अन्तागढ़ मद्रासीपारा स्थित कृषि उप मंडी इस समय बारदाना की कमी से जूझ रहा है जिसका असर मंडी प्रांगण में अपनी बारी का इन्तजार कर रहे करीब 100 से अधिक कृषकों को भारी पड़ रहा है। इसमें से ज्यादातर लोग दूरस्थ स्थान से आये हुए हंै जो अपना काम-धाम छोडक़र बीते कुछ दिनों से अपनी साल भर की मेहनत की कमाई का फल लेने मण्डी पहुंचे थे लेकिन उन्हें अपनी बारी के इन्तजार करते हुए आज करीब 11 दिन बीत जाने पर भी वे कृषक बारदाना नहीं होने के कारण अपना धान नहीं बेच पाये हंै।
बता दें कि अन्तागढ़ धान खरीदी केन्द्र के अंतर्गत कुल 60 गांव आते हंै जिसमें इस गांव की अधिकतम दूरी 50 किलोमीटर के लगभग है। इस केन्द्र में अभी तक 57 हजार 257 बारादाना पहुंचा था जो अब खत्म हो चुका है और अभी 20 हजार बारदाना की आवश्यकता है और इस केन्द्र में 22891 क्विंटल 80 किलो की खरीदी हो चुकी। लेकिन आज बारदाना न होने के चलते खरीदी बन्द हो चुकी है जिससे पिछले 11 दिनों से अपनी बारी का इन्तजार कर रहे किसानों के लिए चिन्ता का विषय बन गया है।
धान बेचने कर रहे मण्डी प्रांगण में रखवाली-पिछले सप्ताह भर मण्डी पर जमे हुए कृषकों में लामन सिंह, शिवराम कोर्राम व अन्य किसानों का कहना है कि हम तो यहां पिछले 11 दिनों से मण्डी प्रांगण में डेरा जमाये बैठे हैं। शुरू-शुरू में एक-दो दिन में तो हमने अपना भोजन होटल में किया लेकिन दो दिनों बाद पैसा खत्म होने की स्थिति को देखते हुए हमने अपना खाना मंडी प्रांगण में ही बनाना शुरु कर दिया और पैसे के अभाव में अब हम अपना लाए हुए धान को व्यापारियों के पास जा कर बेच कर यहां गुजारा चला रहे हैं और अपनी धान की रखवाली कर रहे हैं। अभी तक यहां सभी किसानों ने 2 से 3 बोरा धान तो अपना गुुुजारा करने के लिए व्यापारियों के पास बेच दी है जिससे वे तेल, सब्जी, साबुन दैनिक आवश्यकता की चीजें खरीद रहे हैं।
धान बोरी की चार दीवारी बना कर, खुले आसमान में कर रहे हैं रात गुजारा- बता दें इस भीषण शीत लहर के बीच पिछले कुछ सप्ताह से अधिक समय से मण्डी प्रांगण में रह रहे किसानों के लिए एक आफत बनी हुई है जो इस कडक़ड़ाती ठंड का सामना खुले आसमान में अपनी फसल की रक्षा करते दिख रहे हैं। कुछ किसान तो धान बोरी की चार दीवारी बना कर ठण्डी हवा से बचने की कोशिश कर रहे हैं तो कुछ अलाव का सहारे लिए रात काट रहे हैं तो कुछ पाल के सहारे लिए हैं।
ट्रैक्टर व लेबर का बढ़ रहा भाड़ा: आज भी कृषि प्रांगण में 20 से अधिक ट्रेक्टर मौजूद हैं ये जिनका किराया दिनोंदिन किसानों के कंधों के पर बढ़ रहा है। जेठेगांव से आये कृषक रामदेव मरका, योगेश, दयाराम, राधेश्याम, बिसाहूराम नारद आदि किसानों ने अपना दुखड़ा बताया कि हमने अपना धान मण्डी केन्द्र अन्तागढ़ में लाने के किए ट्रेक्टर किराये पर लाए थे जिसमें किसी किसान का 1500 सौ रुपये प्रतिदिन तो किसी का 800 सौ प्रतिदिन के हिसाब से था किराया देना पड़ रहा था। हम दो-तीन दिन तक तो हमने टे्रक्टर को अपने साथ रखा लेकिन धान बेचने की बारी न आने के चलते हमने किराया में ली हुई टे्रक्टर वापस लौटा दी क्योंकि रोज का किराया हम वहन नहीं कर सकते थे। पहले तो यहां 100 से अधिक टे्रक्टर खड़ी हुई थी, लेकिन सभी किसानों में लौटा दी तो कुछ तो आज तक अपने साथ टे्रक्टर को रखे हुए है और किराया बढ़ा रहे हैं।
मण्डी प्रांगण में अपनी बारी का इंतजार कर रहे किसानों में तो ज्यादातर तो 50 किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचे हैं जिसमें नेलसोड़, जेठेगांव, अमोड़ी ग्राम के हैं। केन्द्र तक पहुंचने के लिए इन्हें लम्बी दूरी तय करनी पड़ती है क्योंकि मार्ग में सडक़ व पुल न होने के कारण भानुप्रतापुर ब्लाक होते हुए अन्तागढ़ तक वाहन से पहुंचते हैं। ठतनी परेशानी झेलते हुए कृषक आज भी बारदाने के आने के इन्तजार में डटे हुए हैं। वही लैम्पस से सम्बंधित लोगों का कहना है कि एक दो दिन का और समय लग सकता है बारदाना आने में।


