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कन्याकुमारी जिला जेल के तीन वार्डन निलंबित, गंभीर आरोपों की जांच पूरी होने तक रहेगा प्रभावी

तमिलनाडु की कन्याकुमारी जिला जेल में तैनात तीन जेल कर्मियों को उनके खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की जांच पूरी होने तक तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है

कन्याकुमारी जिला जेल के तीन वार्डन निलंबित, गंभीर आरोपों की जांच पूरी होने तक रहेगा प्रभावी
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नागरकोइल। तमिलनाडु की कन्याकुमारी जिला जेल में तैनात तीन जेल कर्मियों को उनके खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की जांच पूरी होने तक तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई जनहित और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक निलंबन प्रभावी रहेगा।

पालयमकोट्टई सेंट्रल जेल के अधीक्षक जी.बी. सेंथमराईकन्नन द्वारा जारी अलग-अलग आदेशों के अनुसार, निलंबित किए गए कर्मचारियों में ग्रेड-1 वार्डन एन. जेहान, ग्रेड-2 वार्डन जे. शिवकुमार, और चीफ हेड वार्डन एन. सुरेश उर्फ थिरुमलाईनाम्बी शामिल हैं।

जारी आदेश में कहा गया है कि तीनों अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच प्रस्तावित है। ऐसे में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करना आवश्यक समझा गया। यह कार्रवाई तमिलनाडु सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियमों के नियम 17(ई) के तहत की गई है।

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि मामला जनहित से जुड़ा होने के कारण आरोपों के स्वरूप और निलंबन के विस्तृत कारणों का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया जा सकता। प्रशासन का कहना है कि जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए फिलहाल सीमित जानकारी ही साझा की जा रही है।

निलंबन अवधि के दौरान तीनों कर्मचारियों को सेवा नियमों के अनुसार फंडामेंटल रूल्स के नियम 53(1) के तहत निर्धारित गुजारा भत्ता (सब्सिस्टेंस अलाउंस) और महंगाई भत्ता दिया जाएगा। साथ ही, उनका मुख्यालय नागरकोइल निर्धारित किया गया है और उन्हें सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।

जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह निलंबन 14 जुलाई से प्रभावी हो गया है और अगले आदेश तक जारी रहेगा। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की प्रशासनिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, प्रशासन ने आरोपों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि गंभीर मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इस प्रकार की कार्रवाई आवश्यक होती है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोप कितने गंभीर हैं और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका क्या रही।


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