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मद्रास हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों की समस्या पर तमिलनाडु और पुडुचेरी से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी

मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु और पुडुचेरी सरकारों से आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से निपटने और नागरिकों को कुत्तों के हमलों से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

मद्रास हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों की समस्या पर तमिलनाडु और पुडुचेरी से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी
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चेन्नई। मद्रास हाई कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु और पुडुचेरी सरकारों से आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से निपटने और नागरिकों को कुत्तों के हमलों से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

चीफ जस्टिस एस.ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की डिवीजन बेंच ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी रिकॉर्ड पर रखें।

बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लागू करते समय स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों पर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए।

कोर्ट ने यह निर्देश एक 'सुओ मोटो' (स्वतः संज्ञान) मामले की सुनवाई के दौरान दिया। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद शुरू किया गया था जिसमें हाई कोर्ट्स को आवारा कुत्तों के प्रबंधन के उपायों के पालन की निगरानी करने के लिए कहा गया था।

जजों ने दोनों प्रशासनों के विभागों को अब तक हुई प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट जमा करने का भी आदेश दिया।

यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 19 मई, 2026 के उस आदेश के बाद उठाया गया है जिसमें सभी हाई कोर्ट्स को 'सुओ मोटो' रिट याचिकाएं दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। इन याचिकाओं का मकसद स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों सहित सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देशों के पालन की निगरानी करना था।

सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि आदेशों को लागू करने में विफल रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का भी निर्देश दिया था। साथ ही, हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह से काम करने वाला 'एनिमल बर्थ कंट्रोल' (एबीसी) सेंटर होना अनिवार्य किया गया था। सरकारों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया था कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हों।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु और पुडुचेरी में इसके कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक 'सुओ मोटो' मामला दर्ज किया। मुख्य सचिवों और पशुपालन, स्वास्थ्य, नगर प्रशासन और जलापूर्ति विभागों के सचिवों सहित वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए।

कोर्ट ने उन्हें अगली सुनवाई से पहले रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 21 जुलाई के लिए टाल दी गई है।


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