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तमिलनाडु : मदुरंतकम-धारापुरम उपचुनाव पर रोक की मांग वाली याचिका पर आज मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई

मद्रास हाई कोर्ट गुरुवार को उस जनहित याचिका पर अपना फैसला सुनाएगा, जिसमें तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव रोकने की मांग की गई है

तमिलनाडु : मदुरंतकम-धारापुरम उपचुनाव पर रोक की मांग वाली याचिका पर आज मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई
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चेन्नई। मद्रास हाई कोर्ट गुरुवार को उस जनहित याचिका पर अपना फैसला सुनाएगा, जिसमें तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव रोकने की मांग की गई है। याचिका में मांग की गई है कि चुनाव जीतने के कुछ समय बाद राजनीतिक कारणों से इस्तीफा देकर दोबारा उपचुनाव लड़ने वाले विधायकों से चुनाव का खर्च वसूलने के लिए व्यवस्था बनाई जाए।

चेन्नई के सैदापेट निवासी अधिवक्ता के. सुथन ने यह जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग को ऐसी उचित प्रक्रिया बनाने का निर्देश देने की मांग की है, जिसके तहत चुनाव जीतने के कुछ समय बाद राजनीतिक कारणों से इस्तीफा देने और फिर उपचुनाव लड़ने वाले विधायकों से चुनाव खर्च की भरपाई कराई जा सके।

याचिका में यह भी मांग की गई कि ऐसी व्यवस्था के तहत संबंधित पूर्व विधायक जब उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करें, तब उनसे 'चुनाव खर्च सिक्योरिटी डिपॉजिट' लिया जाए। साथ ही मामले का निपटारा होने तक मदुरंतकम और धारापुरम में उपचुनाव कराने पर रोक लगाने की मांग की गई।

पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि संबंधित विधायक चुनाव जीतने के कुछ ही समय बाद बिना किसी ठोस कारण के इस्तीफा देकर दूसरी राजनीतिक पार्टी के टिकट पर उपचुनाव लड़ रहे हैं। इन इस्तीफों के कारण दोबारा चुनाव कराने की जरूरत पड़ी और इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। ऐसे में उपचुनाव के खर्च के लिए इस्तीफा देने वाले पूर्व विधायकों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

याचिका का संबंध पूर्व एआईएडीएमके विधायक के. मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यभामा से है। दोनों अपने पद से इस्तीफा देने के बाद सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल हुए और अब क्रमशः मदुरंतकम और धारापुरम से पार्टी के उम्मीदवार हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि फिलहाल विधायकों से इस तरह चुनाव खर्च वसूलने के लिए कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, इसलिए अदालत उचित निर्देश जारी कर सकती है। यह भी कहा गया कि अगर इस संबंध में कानूनी बदलाव नहीं किया गया तो ऐसी स्थिति भविष्य में दोबारा पैदा हो सकती है।

दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब 24 सितंबर को मद्रास हाईकोर्ट इस मामले में फैसला सुनाएगा।


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