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तमिलनाडु : सीएम स्टालिन ने पीएम मोदी से श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों को नागरिकता या स्थायी वीजा देने की अपील की

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक डी.ओ. पत्र लिखकर श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों की लंबे समय से चली आ रही कानूनी अनिश्चितता को समाप्त करने की अपील की है

तमिलनाडु : सीएम स्टालिन ने पीएम मोदी से श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों को नागरिकता या स्थायी वीजा देने की अपील की
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चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक डी.ओ. पत्र लिखकर श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों की लंबे समय से चली आ रही कानूनी अनिश्चितता को समाप्त करने की अपील की है। यह पत्र मानवीय, संवैधानिक और राष्ट्रीय महत्व का मामला बताते हुए लिखा गया है, जिसमें तमिलनाडु में रह रहे लगभग 89,000 श्रीलंकाई तमिलों की स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

पत्र में स्टालिन ने याद दिलाया कि 1983 से श्रीलंका में जातीय संघर्ष के कारण भागे इन शरणार्थियों को तमिलनाडु की विभिन्न सरकारों ने केंद्र की सहमति से आश्रय, गुजारा भत्ता, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की हैं। आज इनमें से अधिकांश 30 वर्ष से अधिक समय से भारत में रह रहे हैं, जबकि लगभग 40 प्रतिशत यहां पैदा हुए हैं। राज्य ने अपनी मानवीय जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाया है, लेकिन ये लोग दशकों से कानूनी अनिश्चितता में जी रहे हैं। नागरिकता या लंबे समय के वीजा जैसे स्थायी समाधान न मिलने से उनकी स्थिति कमजोर बनी हुई है।

स्टालिन ने बताया कि राज्य सरकार ने गैर-निवासी तमिल मंत्री की अध्यक्षता में एक सलाहकार समिति गठित की थी, जिसने इन शरणार्थियों की स्थिति का विस्तृत अध्ययन किया। समिति ने पाया कि कई श्रेणियां मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत नियमितीकरण (रेगुलराइजेशन) के योग्य हैं, जैसे 30 जून 1987 से पहले भारत में जन्मे व्यक्ति, भारतीय माता-पिता से जन्मे, भारतीय नागरिकों के जीवनसाथी, भारतीय मूल के वंशज और लंबे समय के वीजा के पात्र।

मुख्यमंत्री ने 2003 में सिटिजनशिप एक्ट में हुए संशोधन का जिक्र किया, जिसने 'अवैध प्रवासी' की श्रेणी शुरू की और इससे इन शरणार्थियों पर अनचाहा प्रभाव पड़ा, क्योंकि वे केंद्र की मंजूरी से मानवीय आधार पर आए थे। 1986 के प्रशासनिक निर्देशों ने भी नागरिकता आवेदनों को रोक दिया। हालांकि, 2025 के इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स (एग्जेम्पशन) ऑर्डर जैसे हालिया विकास सकारात्मक संकेत देते हैं।

स्टालिन ने मद्रास हाई कोर्ट के पी. उलगनाथन बनाम भारत सरकार (2019) फैसले का हवाला देते हुए कहा कि न्यायिक व्याख्या में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। उन्होंने केंद्र से चार प्रमुख अनुरोध किए- श्रीलंकाई तमिलों के नागरिकता आवेदनों पर रोक लगाने वाले पुराने प्रशासनिक निर्देशों को रद्द करना, तमिलनाडु सरकार द्वारा सत्यापित पहचान दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट-वीजा आवश्यकताओं को माफ करने का कार्यकारी स्पष्टीकरण जारी करना, आवेदनों की आसान प्रक्रिया के लिए जिला-स्तरीय अधिकारियों को उचित शक्तियां प्रदान करना और 9 जनवरी 2015 तक भारत में शरण लिए रजिस्टर्ड श्रीलंकाई तमिलों की कानूनी स्थिति को स्पष्ट करना कि उन्हें 'अवैध प्रवासी' नहीं माना जाएगा।

स्टालिन ने जोर दिया कि ये लोग चार दशकों से सम्मान, अनुशासन और सांस्कृतिक जुड़ाव के साथ भारत में रह रहे हैं। उनकी उपस्थिति राज्य-मंजूर रही है, और लगातार अनियमित बताना न मानवीय संदर्भ को दर्शाता है न ही वास्तविकता को। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री एक मानवीय और उचित निर्णय लेंगे, जिससे इन परिवारों को स्थायी समाधान मिल सकेगा।


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