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मशहूर इतिहासकार डॉ. के एन पणिक्कर का निधन

मशहूर इतिहासकार और विद्वान डॉ. के एन पणिक्कर का सोमवार को यहां के एसयूटी अस्पताल में निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे और कुछ दिनाें से बीमार चल रहे थे

मशहूर इतिहासकार डॉ. के एन पणिक्कर का निधन
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भारतीय इतिहास लेखन का धर्मनिरपेक्ष स्वर मौन हुआ

  • जेएनयू में पीढ़ियों को गढ़ने वाले विद्वान अब नहीं रहे
  • सबूतों पर आधारित अध्ययन के पैरोकार का अंत

तिरुवनंतपुरम। मशहूर इतिहासकार और विद्वान डॉ. के एन पणिक्कर का सोमवार को यहां के एसयूटी अस्पताल में निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे और कुछ दिनाें से बीमार चल रहे थे।

डॉ. पणिक्कर को भारत के सबसे बड़े इतिहासकारों में से एक माना जाता है। वे अपनी शानदार विद्वत्ता, धर्मनिरपेक्ष नजरिये और सबूतों पर आधारित ऐतिहासिक विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने काम के जरिये हमेशा इस बात पर जोर दिया कि इतिहास को निष्पक्ष होकर पढ़ना चाहिए। उन्होंने भारत के अतीत को राजनीतिक या सांप्रदायिक रंग देने की हर कोशिश का विरोध किया।भारतीय इतिहास लेखन के क्षेत्र में वे अपनी गहरी छाप छोड़ गये हैं।

उनके निधन की खबर केरल इतिहास अनुसंधान परिषद के उनके 90वें जन्मदिन के लिए आयोजित जश्न से ठीक पहले आयी है। इससे साफ झलकता है कि अकादमिक और सांस्कृतिक जगत में उनकी कितनी साख और कितना ऊंचा रुतबा था।

डॉ. पणिक्कर का नयी दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में एक शानदार शिक्षण करियर रहा। वहां उन्होंने इतिहासकारों और विद्वानों की कई पीढ़ियां तैयार की। उन्होंने भारतीय इतिहास लेखन, संस्कृति और राजनीति पर कई अहम किताबें लिखीं। उन्होंने इतिहास के अध्ययन में हमेशा धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और तर्कसंगत चर्चा को बढ़ावा दिया।

वे जीवन भर स्वतंत्र लेखन और शोध के पक्ष में अडिग रहे। उन्होंने इतिहास को राजनीतिक फायदे के लिए बदलने की कोशिशों का हमेशा डटकर मुकाबला किया। उनके बेबाक अंदाज और सांप्रदायिक दबावों की निडर आलोचना ने उन्हें बहुत शोहरत दिलायी। इस वजह से वे कभी-कभी विवादों में भी रहे।

उनके परिवार में पत्नी ऊषा भार्गव, बेटियां रागिनी ,शालिनी तथा दामाद पीतांबर और आर वी रमण हैं। उनके साथी और छात्र उन्हें न केवल उनकी कुशाग्र बुद्धि, बल्कि उनकी सादगी, गर्मजोशी और सच्चाई के प्रति उनके समर्पण के लिए भी याद करते हैं।

डॉ पणिक्कर का जाना भारतीय ऐतिहासिक शोध के एक युग का अंत है। इतिहास के सटीक और धर्मनिरपेक्ष अध्ययन के प्रति उनकी निष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी विरासत है।


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