तमिलनाडु चुनाव से पहले एनडीए को मजबूती, अन्नाद्रमुक ने पीएमके को दीं 18 सीटें
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले अपने चुनावी समीकरण को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) ने पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के साथ सीट बंटवारे पर सहमति बना ली है

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले अपने चुनावी समीकरण को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) ने पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के साथ सीट बंटवारे पर सहमति बना ली है। इस समझौते के तहत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल पीएमके को 18 विधानसभा सीटें आवंटित की गई हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, पीएमके को जिन प्रमुख सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा, उनमें सलेम (पश्चिम), धर्मपुरी, पेननगरम, विक्रवंडी, शोलिंगुर, मयिलादुथुरै, तिरुप्पोरूर, उथिरामेरूर, जयकोंडम, पोलूर, गिंगी, विरुधाचलम, रिशिवंदियम, कट्टुमन्नारकोइल (एससी), कीझवेलूर (एससी), पेरंबूर, सलेम नॉर्थ और अंबत्तूर शामिल हैं। ये सीटें खासतौर पर उत्तर और उत्तर-मध्य तमिलनाडु में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, जहां पीएमके का प्रभाव देखा जाता है।
अन्नाद्रमुक नेतृत्व का यह फैसला क्षेत्रीय संतुलन और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जो चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पीएमके, जो वन्नियार समुदाय में मजबूत पकड़ रखती है, अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने के साथ-साथ एनडीए के व्यापक मंच का लाभ उठाने की कोशिश करेगी।
अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेताओं ने संकेत दिया है कि गठबंधन सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के नेतृत्व वाले गठबंधन के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ेगा। पीएमके के साथ यह समझौता अन्य सहयोगी दलों के साथ होने वाले संभावित समझौतों की शुरुआत माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीटों के बंटवारे पर समय रहते स्पष्टता आने से एनडीए को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। इससे उम्मीदवारों को जमीनी स्तर पर प्रचार करने और मतदाताओं से जुड़ने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।
चुनाव कार्यक्रम के करीब आते ही अन्नाद्रमुक और पीएमके दोनों ही अपने प्रचार अभियान को तेज करने की तैयारी में हैं, जिसमें सुशासन, विकास और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर जोर दिया जाएगा। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की सूची और संयुक्त रैलियों को लेकर भी बड़े ऐलान होने की उम्मीद है।


