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एमके स्टालिन ने 151 मेडिकल सीटों के नुकसान पर टीवीके सरकार से सवाल किया

डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बुधवार को राज्य कोटे से ऑल इंडिया कोटे में 151 सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों के ट्रांसफर को लेकर सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने सरकार पर तमिलनाडु के हितों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया

एमके स्टालिन ने 151 मेडिकल सीटों के नुकसान पर टीवीके सरकार से सवाल किया
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चेन्नई। डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बुधवार को राज्य कोटे से ऑल इंडिया कोटे में 151 सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों के ट्रांसफर को लेकर सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने सरकार पर तमिलनाडु के हितों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने इसे राज्य की मेडिकल शिक्षा प्रणाली के लिए एक गंभीर झटका बताते हुए विस्तृत स्पष्टीकरण की मांग की।

सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में स्टालिन ने इस मुद्दे को तमिलनाडु के लिए बेहद अहम बताया और कहा कि 151 सीटों के नुकसान का राज्य में स्वास्थ्य सेवा पर लंबे समय तक असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि इन सीटों से बड़ी संख्या में सुपर-स्पेशियलिटी डॉक्टर तैयार हो सकते थे, जो तमिलनाडु में मरीजों की सेवा करते और आने वाले वर्षों में राज्य के स्वास्थ्य सेवा ढांचे को मजबूत बनाते।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सीटों को लेकर कानूनी लड़ाई में सरकार के रवैये पर सवाल उठाया और पूछा कि उसने तमिलनाडु विधानसभा में सीटों को ऑल इंडिया कोटे में ट्रांसफर करने का विरोध करते हुए कोई प्रस्ताव क्यों पारित नहीं किया।

उन्होंने सरकार के उस फैसले पर भी सफाई मांगी, जिसके तहत उसने सुप्रीम कोर्ट के 29 मई, 2026 के आदेश को अपील के जरिए चुनौती नहीं दी।

स्टालिन ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार की कानूनी रणनीति में लापरवाही बरती गई।

उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार की तरफ से नियुक्त वकील सुनवाई के अहम चरणों में कोर्ट के सामने क्यों पेश नहीं हुए और मामले में असरदार ढंग से बहस करने के लिए किसी सीनियर वकील को नियुक्त करने में देरी क्यों हुई।

सरकार के रवैये को शुरू से ही 'लापरवाह' बताते हुए डीएमके नेता ने दावा किया कि प्रशासन इस मामले को उतनी गंभीरता से आगे नहीं बढ़ा पाया, जितनी जरूरत थी।

उन्होंने यह भी सवाल किया कि तमिलनाडु के पक्ष में मजबूत मामला होने के बावजूद सरकार ने असल में 'हार क्यों मान ली' और सुप्रीम कोर्ट के सामने ठोस दलीलें क्यों पेश नहीं कीं।

घटनाओं के क्रम पर और शक जताते हुए स्टालिन ने पूछा कि ऑल इंडिया काउंसलिंग के दूसरे फेज से पहले स्टेट काउंसलिंग प्रोसेस क्यों किया गया और स्टेट काउंसलिंग के दौरान सभी 151 सुपर-स्पेशियलिटी सीटें खाली क्यों घोषित कर दी गईं।

उन्होंने सवाल किया कि क्या यह कदम जानबूझकर उठाया गया था और टीवीके सरकार से इस मुद्दे के हर पहलू पर साफ जवाब देने को कहा।


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