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टीटीडी के पूर्व चेयरमैन ने तिरुमाला पहाड़ी पर शराब के बड़े रैकेट का आरोप लगाया

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के पूर्व चेयरमैन भूमना करुणाकर रेड्डी ने रविवार को आरोप लगाया कि टीटीडी विजिलेंस, पुलिस और टीटीडी प्रशासन मिलकर पवित्र तिरुमाला पहाड़ी पर चल रहे शराब और गुटखा के एक बड़े रैकेट को छिपा रहे हैं।

टीटीडी के पूर्व चेयरमैन ने तिरुमाला पहाड़ी पर शराब के बड़े रैकेट का आरोप लगाया
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तिरुपति। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के पूर्व चेयरमैन भूमना करुणाकर रेड्डी ने रविवार को आरोप लगाया कि टीटीडी विजिलेंस, पुलिस और टीटीडी प्रशासन मिलकर पवित्र तिरुमाला पहाड़ी पर चल रहे शराब और गुटखा के एक बड़े रैकेट को छिपा रहे हैं।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेता ने सच्चाई का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज और फोन-लोकेशन रिकॉर्ड तुरंत जारी करने की मांग की।

यहां मीडिया से बात करते हुए भूमना करुणाकर रेड्डी ने कहा कि 21 अगस्त को शाम 7.30 से 8 बजे के बीच कौस्तुभम गेस्ट हाउस के पास ईगा रामू को बालाजी नाम के व्यक्ति को शराब की 182 क्वार्टर बोतलें सप्लाई करते हुए पकड़ा गया था, जबकि ईगा प्रिया को अलग से नागतीर्थम के पास हजारों गुटखा पैकेट के साथ पकड़ा गया था। उन्होंने कहा कि हालांकि दोनों को तिरुमाला पहाड़ी पर पकड़ा गया था, लेकिन एफआईआर में दिखाया गया कि उन्हें अगली सुबह अलीपिरी लिंक बस स्टैंड पर पकड़ा गया था।

भूमना ने जानना चाहा कि एफआईआर में घटना की जगह क्यों बदली गई और आरोप लगाया कि तिरुमाला में हुई असली बरामदगी को जानबूझकर छिपाया गया।

उन्होंने कौस्तुभम गेस्ट हाउस, नागतीर्थम और अलीपिरी लिंक बस स्टैंड के सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ संबंधित समय पर एसआई श्रीवाणी और ईगा रामू के फोन लोकेशन जारी करने की मांग की।

उन्होंने आगे सवाल किया कि एफआईआर में आरोपियों की जाति का विवरण विशेष रूप से क्यों बताया गया और अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा।

भुमाना ने दावा किया कि हर दिन तिरुमाला में शराब की लगभग 1,000 क्वार्टर बोतलें पहुंच रही हैं, जो बोतलें बाहर करीब 120 रुपए में खरीदी जाती हैं, वे पहाड़ी पर 350-500 रुपए में बेची जा रही हैं। उन्होंने इस बात की पूरी जांच की मांग की कि यह रैकेट कौन चला रहा है और इसे कौन बचा रहा है।

भूमना ने कहा कि अगर (टीटीडी चेयरमैन) बीआर नायडू में हिम्मत और ईमानदारी है, तो उन्हें बयान जारी करने के बजाय सीसीटीवी फुटेज, फोन लोकेशन और रिकॉर्ड्स जारी करने चाहिए। सबूतों से यह साफ हो जाएगा कि उन्हें असल में कहां पकड़ा गया था और एफआईआर में तथ्यों को क्यों बदला गया।



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