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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हार के बाद संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी में डीएमके

हाल ही में संपन्न तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मिली हार से सबक लेते हुए द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) पार्टी में बड़े पैमाने पर संगठनात्मक बदलाव की तैयारी कर रही है

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हार के बाद संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी में डीएमके
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चेन्नई। हाल ही में संपन्न तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मिली हार से सबक लेते हुए द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) पार्टी में बड़े पैमाने पर संगठनात्मक बदलाव की तैयारी कर रही है। इसका मकसद पार्टी में जान फूंकना और भविष्य के चुनावों के लिए जमीनी स्तर पर अपने नेटवर्क को मजबूत करना है।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि पार्टी की चुनाव समीक्षा समिति से मिलने वाली सिफारिशों के आधार पर, नेतृत्व जिला सचिवों की संख्या मौजूदा 78 से बढ़ाकर 100 से ज्यादा करने पर विचार कर रहा है।

ये प्रस्तावित बदलाव उस व्यापक कवायद का हिस्सा हैं, जिसका मकसद उन कमियों की पहचान करना है जिनकी वजह से पार्टी को चुनावी हार का सामना करना पड़ा, साथ ही संगठन को अधिक प्रभावी राजनीतिक लामबंदी के लिए सुव्यवस्थित करना है।

चुनाव में हार के तुरंत बाद गठित 38 सदस्यीय समीक्षा समिति प्रदेश के सभी जिलों का दौरा कर रही है। साथ ही, पार्टी पदाधिकारियों, पूर्व उम्मीदवारों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ व्यापक विचार-विमर्श कर रही है। उम्मीद है कि यह समिति राज्यव्यापी आकलन पूरा करने के बाद 10 जून को पार्टी नेतृत्व को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी।

सूत्रों के अनुसार, चर्चाओं के दौरान कई बार एक जैसी चिंताएं सामने आईं। बताया जा रहा है कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने स्थानीय इकाइयों में गुटबाजी के अनसुलझे झगड़ों, तालमेल की कमजोर व्यवस्था और संगठन की कमियों का जिक्र किया, जिनका असर चुनाव प्रचार की असरदारता पर पड़ा।

कुछ नेताओं ने चुनाव प्रचार और चुनाव के बाद के समय में गठबंधन सहयोगियों से मिले सहयोग के स्तर पर भी नाखुशी जाहिर की। पार्टी के कुछ पदाधिकारियों का कहना था कि डीएमके को गठबंधन सहयोगियों पर निर्भर रहने के बजाय आने वाले स्थानीय निकाय चुनाव अकेले लड़ने पर विचार करना चाहिए। वहीं, दूसरों ने युवा नेताओं को आगे बढ़ाने और संगठन की जिम्मेदारियों व चुनावी राजनीति, दोनों में उभरते हुए कार्यकर्ताओं को ज्यादा मौके देने की जरूरत पर जोर दिया।

विचार-विमर्श के तहत मुख्य सुझावों में से एक है जिला इकाइयों का पुनर्गठन करना, ताकि जिला सचिवों का काम का बोझ कम किया जा सके। अभी, हर जिला सचिव चार से छह विधानसभा क्षेत्रों की देखरेख करता है। प्रस्तावित मॉडल के तहत, यह संख्या घटाकर प्रति जिला इकाई दो से चार विधानसभा क्षेत्र की जा सकती है, जिससे कई नए जिले बनेंगे और जिला सचिवों की कुल संख्या 100 से ज्यादा हो जाएगी।

रिव्यू कमिटी खुद ही दिखाती है कि पार्टी जेनरेशनल बदलाव पर जोर दे रही है। इसके ज्यादातर सदस्य युवा नेता और यूथ विंग के कार्यकर्ता हैं, जिनमें से कई यूथ विंग सेक्रेटरी उदयनिधि स्टालिन के करीबी माने जाते हैं।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि आने वाली रिपोर्ट डीएमके द्वारा हाल के सालों में किए गए सबसे बड़े ऑर्गेनाइजेशनल रीस्ट्रक्चरिंग की नींव रख सकती है, क्योंकि वह फिर से ग्रुप बनाना, अंदरूनी कमजोरियों को दूर करना और अगले दौर के चुनावी मुकाबलों की तैयारी करना चाहती है।


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