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संसद में परिसीमन विधेयक दोबारा पेश करने पर डीएमके विरोध करे : कांग्रेस

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम और कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने डीएमके से आग्रह किया है कि वह प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का विरोध जारी रखे। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पार्टी अपने रुख में कोई बदलाव करती है, तो यह उसके अपने सिद्धांतों के साथ विश्वासघात होगा।

संसद में परिसीमन विधेयक दोबारा पेश करने पर डीएमके विरोध करे : कांग्रेस
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चेन्नई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम और कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने डीएमके से आग्रह किया है कि वह प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का विरोध जारी रखे। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पार्टी अपने रुख में कोई बदलाव करती है, तो यह उसके अपने सिद्धांतों के साथ विश्वासघात होगा।

खबरों के अनुसार, भाजपा संसद के आगामी मानसून सत्र, जो 20 जुलाई से शुरू होने वाला है, उस दौरान संसदीय परिसीमन पर प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन को फिर से पेश करने की तैयारी कर रही है। इससे पहले, जब अप्रैल 2026 के सत्र में संसद में बिल पेश किया गया था, तो मंजूरी नहीं मिल पाई थी।

मीडिया से बातचीत के दौरान कार्ति चिदंबरम ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि डीएमके उसी रुख पर कायम रहेगी जो उसने इस साल की शुरुआत में बिल पर बहस के दौरान अपनाया था।

उन्होंने भरोसा जताया कि अगर इस कानून को संसद में दोबारा लाया जाता है, तो पार्टी इसका विरोध जारी रखेगी।

तमिलनाडु की नई चुनी हुई सरकार के बारे में बात करते हुए कार्ति ने कहा कि उसके कामकाज का मूल्यांकन उसके पहले पूर्ण बजट पेश होने के बाद ही करना सही होगा। सरकार के पास विधानसभा में मजबूत बहुमत है, इसलिए उसे राजनीतिक जोड़-तोड़ या विरोधी पार्टियों को अस्थिर करने की कोशिशों का सहारा लेने की जरूरत नहीं है और वह अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने की अच्छी स्थिति में है।

हिरासत में होने वाली मौतों पर कांग्रेस सांसद ने कहा कि ऐसी घटनाएं अलग-अलग सरकारों के समय में होती रही हैं और इन्हें सिर्फ एक प्रशासन की जिम्मेदारी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने तर्क दिया कि पुलिस व्यवस्था में गहरे सुधार की जरूरत है और जोर दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम करने के लिए संस्थागत संस्कृति में बदलाव जरूरी है। मंत्रियों या विधायकों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से उचित प्रक्रिया के जरिए तेजी से निपटा जाना चाहिए।

उन्होंने छात्रों से जुड़ी हिंसा की घटनाओं पर कहा कि जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं हो सकती। उन्होंने माता-पिता, शिक्षकों और छात्रों के बीच ज्यादा जवाबदेही और जागरूकता की जरूरत पर जोर दिया।


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