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25 साल की उम्र में विधायक बनीं थी सुषमा

सुषमा स्वाराज का आज दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। सामान्य परिवार में जन्मी सुषमा स्वराज का रुझान शुरूआत से ही राजनीति की ओर था

25 साल की उम्र में विधायक बनीं थी सुषमा
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नई दिल्ली। सुषमा स्वाराज का आज दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। सामान्य परिवार में जन्मी सुषमा स्वराज का रुझान शुरूआत से ही राजनीति की ओर था। इमरजेंसी के बाद जब देश में चुनाव हुए तो सुषमा स्वराज हरियाणा की अंबाला सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ी। और सिर्फ 25 वर्ष की उम्र में वो विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बनीं। हरियाणा में जनता दल की सरकार बनी। मुख्यमंत्री देवीलाल ने उन्हें अपनी सरकार में मंत्री बनाया। इस तरह उनके नाम सबसे कम उम्र में मंत्री बनने का रिकॉर्ड बन गया। इसके बाद सुषमा राजनीति की सीढ़ियां चढ़ती चली गईं। वो दिल्ली की मुख्यमंत्री और केंद्रीय कैबिनेट में भी शामिल रहीं। नब्बे के दशक में सुषमा स्वराज केंद्रीय राजनीति में सक्रिय हो गईं। अटल बिहारी वाजेपीय की सरकार में 1996 और 1998 में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी

1998 में भाजपा ने साहिब सिंह वर्मा के स्थान पर सुषमा स्वराज को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया। मुख्यमंत्री पद पर उनका कार्यकाल काफी छोटा रहा। क्योंकि उनके नेतृत्व में भाजपा दिल्ली विधानसभा का चुनाव हार गई। पार्टी की हार के बाद सुषमा स्वराज ने दिल्ली विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया। और एक बार फिर केंद्रीय राजनीति में लौट गई और वाजपेयी सरकार में फिर उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

सोनिया गांधी के खिलाफ लड़ा चुनाव

सुषमा स्वराज 1996 में दक्षिण दिल्ली से सांसद चुनी गई थी। 1999 में भी इस बात की उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें दक्षिण दिल्ली से ही चुनाव लड़ाएगी। लेकिन अचानक ही उन्हें पार्टी ने वैल्लारी से चुनाव लड़ने का निर्देश दिया। वैल्लारी सीट पर कांग्रेस की राष्टï्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी चुनाव लड़ रहीं थी। इसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। सुषमा वैल्लरी पहुंची और वहां रहकर चुनाव अभियान चलाया। सुषमा भले ही सोनिया गांधी से ये मुकाबला हार गई। लेकिन उन्होंने उस चुनाव में राष्टï्रीय मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा।

2000 में फिर बनीं केंद्र में मंत्री

सुषमा भले ही वैल्लारी लोकसभा सीट से चुनाव हार गई। भाजपा ने सुषमा को राज्यसभा में भेजा और वर्ष 2000 में एक बार फिर वाजपेयी सरकार में उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया। 2003 तक वो सूचना एवं प्रसारण मंत्री रहीं। इसके बाद उन्हें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री बनाया गया।

2009 में बनी विपक्ष की नेता

सुषमा स्वराज 2009 का लोकसभा चुनाव मध्य प्रदेश की विदिशा सीट से जीतीं। भाजपा विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और सुषमा स्वराज को लोकसभा में विपक्ष का नेता चुना गया। सुषमा स्वराज पांच साल तक विपक्ष की नेता रहीं। इस दौरान उन्होंने जनहित के कई मुद्दों को उठाया।

2014 में बनीं विदेश मंत्री

दस साल बाद 2014 में केंद्र में एक बार फिर भाजपा की सरकार बनी। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को स्पष्टï बहुमत मिला और मोदी सरकार में सुषमा स्वराज को विदेशी मंत्री बनाया गया। सुषमा स्वराज को विदेश में फंसे भारतीयों की मदद के लिए याद किया जाता। सिर्फ एक ट्वीट पर वो लोगों को मदद पहुंचाती थी। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों के चलते 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था। भाजपा की जीत के बाद मन जा रहा था कि वे दोबारा विदेश मंत्री बनेंगी, लेकिन उन्होंने खराब सेहत के चलते मंत्री पद नहीं लिया।


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