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राफेल मामले पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला सुरक्षित

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को अदालत की निगरानी में फ्रांस की कंपनी दसॉ एविएशन के साथ राफेल लड़ाकू जेट विमान सौदे की जांच की मांग वाली चार याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया

राफेल मामले पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला सुरक्षित
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नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को अदालत की निगरानी में फ्रांस की कंपनी दसॉ एविएशन के साथ राफेल लड़ाकू जेट विमान सौदे की जांच की मांग वाली चार याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सरकार ने स्वीकार किया कि फ्रांस की सरकार ने सौदे का समर्थन करने की कोई स्वायत्त गारंटी नहीं दी है। अदालत ने विमान की कीमत के मसले को लेकर याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए विवाद का महान्यायवादी के. के. वेणुगोपाल को तब तक जवाब नहीं देने को कहा जब तक अदालत इसकी जांच करने का फैसला नहीं करती है।

सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की पीठ ने कहा, "कीमत पर चर्चा तभी होगी जब हम फैसला करेंगे।" महान्यायवादी ने राफेल सौदे की न्यायिक समीक्षा का भी विरोध किया।

उन्होंने कहा कि अगर हथियार और विमान की कीमतें सार्वजनिक की जाएंगी तो दुश्मनों को राफेल विमान में लगे हथियारों का पता चल जाएगा।

मामले में तीन घंटे तक चली सुनवाई के दौरान वेणु गोपाल ने पीठ को बताया, "हालांकि फ्रांस (सरकार) की ओर से कोई स्वायत्त गारंटी नहीं दी गई है, लेकिन एक प्रकार का विधिक आश्वासन (लेटर ऑफ कंफर्ट) दिया गया है।"

सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने 126 विमानों की खरीद (18 उड़ान की स्थिति में और 108 एचएएल द्वारा विनिर्माण) की प्रक्रिया को निरस्त कर 36 जेट विमान पूरी तरह तैयार दशा में खरीदने और एचएएल को ऑफसेट साझेदार के रूप में हटाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल किए।

याचिकाएं प्रशांत भूषण, अरुण शौरी और पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा व अन्य द्वारा दायर की गई हैं।


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