मप्र में पंचायत चुनाव संविधान के अनुसार कराने के सर्वोच्च न्यायालय ने दिए निर्देश
मध्य प्रदेश में होने वाले पंचायतों के चुनाव के मामले में सर्वोच्च न्यायालय का सख्त रवैया सामने आया है

भोपाल। मध्य प्रदेश में होने वाले पंचायतों के चुनाव के मामले में सर्वोच्च न्यायालय का सख्त रवैया सामने आया है। कोर्ट ने राज्य सरकार व राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए हैं कि संविधान के अनुसार पंचायत के चुनाव कराए जाएं। ऐसा नहीं हुआ तो चुनाव रद्द भी किए जा सकते हैं। ज्ञात हो कि पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी किए जाने के साथ नामांकन भरे जाने का दौर चल रहा है। वहीं आरक्षण के रोटेशन सहित अन्य मामलों की याचिकाएं उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक में दायर की गई हैं।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता विवेक तन्खा के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए हैं कि चुनाव संविधान के हिसाब से हो तो ही कराइए।
बताया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने अन्य पिछड़ा वर्ग के मामले में अधिसूचना जारी करने को कहा है। साथ ही यह भी कहा है कि अगर कानून का पालन नहीं किया तो चुनाव रद्द भी किए जा सकते हैं। इस मामले पर अगली सुनवाई 27 दिसंबर को होगी।
ज्ञात हो कि इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने आरक्षण में रोटेशन का पालन न किए जाने पर दायर की गई सैयद जाफर और जया ठाकुर सहित अन्य याचिकाओं की सुनवाई जबलपुर उच्च न्यायालय में करने को कहा था। यह याचिकाएं गुरुवार को उच्च न्यायालय में पहुंचीं।
सैयद जाफर ने शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश का हवाला देते हुए कहा, सर्वोच्च न्यायालय ने आज मध्य प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुसार ग्राम पंचायत व नगर निगम , नगर पालिका के चुनाव करने के लिए निर्देश दिए। साथ ही कहा है कि अगर संविधान के हिसाब से है तो प्रक्रिया रखें और सविधान के खिलाफ है तो चुनाव रद्द करें। यह निर्णय राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को लेना है।


