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सुखबीर सिंह ने मीडिया घरानों पर आयकर छापेमारी की निंदा की

शिअद के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि केंद्र को कोविड-19 कुप्रबंधन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर आलोचना का सकारात्मक जवाब देना चाहिए, क्योंकि वे देश के नागरिकों की भावनाओं को दिखाते हैं

सुखबीर सिंह ने मीडिया घरानों पर आयकर छापेमारी की निंदा की
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चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने गुरुवार को मीडिया आउटलेट्स पर आयकर छापेमारी की निंदा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के कोविड-19 महामारी के कुप्रबंधन को उजागर करने और पेगासस स्पाइवेयर के माध्यम से राजनेताओं, पत्रकारों और एक्टिविस्ट पर केंद्र सरकार की निगरानी को लेकर कड़े सवाल पूछने पर मीडिया आउटलेट्स पर छापेमारी की जा रही है। बादल ने यहां एक बयान में कहा कि यह निंदनीय है कि राजग सरकार ने हिंदी के रोजाना निकलने वाले अखबार दैनिक भास्कर और भारत समाचार समूह को निशाना बनाया है, क्योंकि उन्होंने पत्रकारिता के उच्च मानकों को ध्यान में रखते हुए सरकार से कड़े सवाल किए थे।

उन्होंने कहा, केंद्र सरकार को इस तरह से प्रेस की स्वतंत्रता का गला घोंटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अकाली दल संकट की इस घड़ी में मीडिया के साथ मजबूती से खड़ा है।

बादल ने कहा कि केंद्र को कोविड-19 कुप्रबंधन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर आलोचना का सकारात्मक जवाब देना चाहिए, क्योंकि वे देश के नागरिकों की भावनाओं को दिखाते हैं।

उन्होंने कहा कि दैनिक भास्कर ने केंद्र और कई राज्यों द्वारा महामारी से निपटने के तरीके को उजागर कर दिया है। इसने बड़े पैमाने पर पेगासस स्पाइवेयर के माध्यम से कई राजनेताओं के साथ-साथ पत्रकारों और एक्टिविस्ट की निगरानी को भी कवर किया है, जो शायद एनडीए सरकार को पसंद नहीं आया है।

बादल ने कहा कि यह भी सामने आया है कि दैनिक भास्कर के कार्यालयों में मौजूद कर्मचारियों के मोबाइल जब्त कर लिए गए और रात की ड्यूटी वाले कर्मचारियों को कार्यालय छोड़ने से रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि चौथे स्तंभ का इस तरह का उत्पीड़न लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।

राजग सरकार से अपने कामकाज में सुधार लाने के लिए कहते हुए अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि सरकार किसानों और किसान आंदोलन के प्रति भी प्रतिशोधात्मक रुख अपना रही है, क्योंकि किसान आंदोलन ने उसकी नीतियों पर सवाल उठाया है।

उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के तर्क पर भी सवाल उठाया कि सरकार स्पष्ट रूप से किसानों के साथ बातचीत के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा, सरकार को पहले तीन कृषि कानूनों को निरस्त करना चाहिए।


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