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8 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है 'विश्व साक्षरता दिवस', किसने की इसकी शुरुआत?

किसी भी समाज या राष्ट्र की उन्नति के लिए यह बहुत जरूरी है कि उसके ज्यादा से ज्यादा नागरिक शिक्षित हों। साक्षरता केवल रोजगार पाने का जरिया नहीं है। यह हमें दुनिया को देखने का एक अलग नजरिया, सही और गलत के बीच फर्क करने की क्षमता और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता के साथ ही जीवन जीने का बेहतर तरीका भी सिखाती है।

8 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है विश्व साक्षरता दिवस, किसने की इसकी शुरुआत?
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नई दिल्ली। किसी भी समाज या राष्ट्र की उन्नति के लिए यह बहुत जरूरी है कि उसके ज्यादा से ज्यादा नागरिक शिक्षित हों। साक्षरता केवल रोजगार पाने का जरिया नहीं है। यह हमें दुनिया को देखने का एक अलग नजरिया, सही और गलत के बीच फर्क करने की क्षमता और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता के साथ ही जीवन जीने का बेहतर तरीका भी सिखाती है।

हर वर्ष 8 सितंबर को 'अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस' मनाया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरुआत कब हुई थी? इसका मुख्य उद्देश्य क्या है और इस वर्ष इसे मनाने की थीम क्या है?

विश्व साक्षरता दिवस प्रत्येक वर्ष 8 सितंबर को ही मनाया जाएगा। यह फैसला संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने 17 नवंबर 1965 को किया था, जिसके बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितंबर 1967 को मनाया गया और उसके बाद से हर वर्ष इस दिवस को मनाया जाने लगा।

यूनेस्को द्वारा इस वर्ष विश्व साक्षरता दिवस मनाने का थीम 'लोगों, ग्रह और समृद्धि के लिए साक्षरता' रखा गया है। इसी के साथ इस वर्ष इस दिवस की शुरुआत के 60 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का उद्देश्य व्यक्तिगत, सामुदायिक और सामाजिक स्तर पर साक्षरता के महत्व को उजागर करना है। इस दिन शिक्षा को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर निरक्षरता को खत्म करने के प्रयास करने के लिए दुनिया भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

जब पूरी दुनिया मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने की तैयारी कर रही है, तो आइए इस मौके पर हम भारत की साक्षरता दर पर भी नजर डाल लेते हैं। देश में आधिकारिक तौर पर पूर्ण साक्षरता दर का आकलन अंतिम बार वर्ष 2011 की जनगणना के दौरान किया गया था, जहां भारत की कुल साक्षरता दर 74.04 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 82.14 प्रतिशत और महिलाओं की साक्षरता दर 65.46 प्रतिशत थी।

वहीं, सरकार ने समय-समय पर देश में साक्षरता दर को बढ़ाने और निरक्षरता को खत्म करने के विभिन्न अभियान और योजनाएं चलाई हैं, जिनमें उल्लास - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम, सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए), राष्ट्रीय साक्षरता मिशन (एनएलएम), साक्षर भारत मिशन (एसबीएम), पढ़ें भारत बढ़ें भारत (पीबीबीबी) और प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (पीएमजीदिशा) आदि शामिल हैं।


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