Top
Begin typing your search above and press return to search.

सोशल मीडिया पर आलोचना से रोकना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन : महबूबा

जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने से रोकने के लिए सर्कुलर जारी करने के एक दिन बाद पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने सरकार पर निशाना साधते हुए सर्कुलर को ‘लोगों के मौलिक अधिकारों का पूर्ण उल्लंघन’ बताया

सोशल मीडिया पर आलोचना से रोकना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन : महबूबा
X

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने से रोकने के लिए सर्कुलर जारी करने के एक दिन बाद पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने सरकार पर निशाना साधते हुए सर्कुलर को ‘लोगों के मौलिक अधिकारों का पूर्ण उल्लंघन’ बताया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा,“चाहे वह ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करना हो या कर्मचारियों को सोशल मीडिया गैग, जम्मू-कश्मीर में लोगों को उनकी आजीविका से बेदखल करने का एक स्पष्ट खतरा सामने आया है। लोगों के मौलिक अधिकारों का पूरी तरह से उल्लंघन करते हुए अधिकारी, न्यायाधीश, जूरी और जल्लाद बन गए हैं।”

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए। दिशा-निर्देशों के अनुसार कोई भी कर्मचारी किसी भी पोस्ट, ट्वीट या अन्य माध्यम से सोशल मीडिया पर सरकार द्वारा अपनाई गई किसी नीति या की गई कार्रवाई पर चर्चा या आलोचना नहीं करेगा, न ही वह किसी भी तरीके से ऐसी किसी चर्चा में सोशल मीडिया पेज समुदायों/माइक्रो-ब्लॉग पर भाग लेगा/लेगी।

सामान्य प्रशासन विभाग के आयुक्त सचिव की ओर से जारी आदेश में कहा गया,“कोई भी कर्मचारी ऐसी सामग्री को पोस्ट, ट्वीट या किसी अन्य सोशल मीडिया अकाउंट पर ऐसे सामग्री साझा नहीं करेगा, जो प्रकृति में राजनीतिक या धर्मनिरपेक्ष और सांप्रदायिक है।” इसमें आगे कहा गया है कि कोई भी कर्मचारी स्वयं या किसी व्यक्ति के माध्यम से या उसकी देखरेख या नियंत्रण में सोशल मीडिया पर ऐसी कोई गतिविधि नहीं करेगा, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से केंद्र या प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित कानून के खिलाफ हो। कर्मचारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सोशल मीडिया पर ऐसे किसी भी जानकारी को प्रकाशित, पोस्ट या जारी नहीं करेंगे, जिसे गोपनीय माना जाता है या जो सार्वजनिक प्रसार के लिए नहीं है।

दिशानिर्देश कर्मचारियों को अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से सरकार की नीति का बचाव करने और जनता को समझाने की अनुमति दी गयी है। इसमें कहा गया,“एक कर्मचारी, गलतफहमियों को दूर करने, गलत बयानों को ठीक करने और देशद्रोही प्रचार का खंडन करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट और ट्वीट्स में सरकार की नीति का बचाव कर सकता है और जनता को समझा सकता है।” आदेश में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट, सहकर्मियों या व्यक्तियों के बारे में ऐसी कोई सामग्री या टिप्पणी, जो अश्लील, अश्लील, धमकी देने वाली, डराने वाली हो या जो कर्मचारियों के आचरण नियमों का उल्लंघन करती हो को पोस्ट न करें।

सर्कुलर में सरकारी कर्मचारियों को पालन करने के लिए नियमों और दिशानिर्देशों का एक सेट सूचीबद्ध किया गया था और उल्लंघन करने पर उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।

पीडीपी नेता और कर्मचारी संयुक्त कार्रवाई समिति (ईजेएसी) के पूर्व अध्यक्ष रफीक राथर ने कर्मचारियों के बुनियादी मानवाधिकारों पर हमला करने और अनिवार्य रूप से छीनने के लिए सरकार की तीखी आलोचना की। उन्होंने प्रशासन को ‘भयभीत करने वाले’ आदेश जारी करने से परहेज करने की सलाह दी और इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के धमकी भरे आदेश जारी करने की प्रवृत्ति के साथ बने रहने से केवल शत्रुता को बढ़ावा मिलेगा और जम्मू-कश्मीर में कार्य संस्कृति भी प्रभावित होगी।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it