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भोपाल में अनोखा प्रदर्शन, शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों की दंडवत यात्रा

मध्य प्रदेश में शिक्षकों के पदों में वृद्धि किए जाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने सोमवार को राजधानी भोपाल में अनोखा प्रदर्शन किया। अभ्यर्थी राजधानी की सड़कों पर दंडवत यात्रा करते हुए रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से लोक शिक्षण संचालनालय तक पहुंचे

भोपाल में अनोखा प्रदर्शन, शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों की दंडवत यात्रा
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भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षकों के पदों में वृद्धि किए जाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने सोमवार को राजधानी भोपाल में अनोखा प्रदर्शन किया। अभ्यर्थी राजधानी की सड़कों पर दंडवत यात्रा करते हुए रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से लोक शिक्षण संचालनालय तक पहुंचे।

राज्य में उच्च माध्यमिक शिक्षकों की भर्ती के लिए वर्ष 2023 में परीक्षाएं हुईं और अभ्यर्थियों ने बेहतर अंक भी हासिल किया, मगर भर्ती नहीं हो पाई । इसी बात को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी है। वे लगातार पद वृद्धि की मांग करते आ रहे हैं और आंदोलन की राह पर है।

राज्य के विभिन्न हिस्सों के अभ्यर्थी सोमवार को राजधानी पहुंचे और उन्होंने रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से लोक शिक्षण संचालनालय तक दंडवत यात्रा निकाली। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि वर्ष 2023 में शिक्षक भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की गई और उन्होंने दो परीक्षाएं पास की और अच्छे अंक भी हासिल किए।

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि आठ हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती की जानी थी, मगर 2,901 पदों पर ही भर्ती हुई। शेष पदों पर अब तक भर्ती नहीं हो रही है। अभ्यर्थी अच्छे अंक लेकर परीक्षाओं में सफल रहे हैं, मगर भर्ती नहीं हो रही है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि योग्यता धारी होने के बावजूद भर्ती नहीं की जा रही है। वेटिंग सूची में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी हैं जिससे उनमें हताशा बढ़ रही है। इसलिए उनकी मांग है कि पद वृद्धि की जाए।

अभ्यर्थियों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि लोक शिक्षण संचालनालय में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हो रही हैं और वे सफल तथा योग्यताधारी अभ्यर्थियों को शिक्षक बनाने के लिए तैयार नहीं हैं। आज स्थिति यह है कि सरकारी स्कूलों में अतिथि शिक्षकों के जरिए अध्यापन कार्य कराया जा रहा है। इन अतिथि शिक्षकों को भी प्रताड़ित किया जा रहा है और जो मानदेय दिया जा रहा है, वह मजदूर से भी कम है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था लगातार गड़बड़ाती जा रही है और राज्य छत्तीसगढ़ तथा बिहार से भी पिछड़ता जा रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि शिक्षकों की पदस्थापना ही नहीं की जा रही है। आज हम 20वें नंबर पर आ चुके हैं। कई पंचायतों में तो सरपंचों ने शिक्षकों की कमी के चलते स्कूलों में ताले तक लगा दिए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि 20 हजार पदों की वृद्धि की जाए ताकि वेटिंग में जो अभ्यर्थी हैं, उन्हें पदस्थापना मिल सके और राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुधारा जा सके।


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