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आतिशी का सबसे बड़ा अपमान अरविंद केजरीवाल ने उन्हें टेंपरेरी सीएम कहकर किया : अलका लांबा

दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि उनको दिल्ली सीएम आवास से बार-बार निकाला गया

आतिशी का सबसे बड़ा अपमान अरविंद केजरीवाल ने उन्हें टेंपरेरी सीएम कहकर किया : अलका लांबा
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नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि उनको दिल्ली सीएम आवास से बार-बार निकाला गया। इस पर कांग्रेस नेता अलका लांबा ने सीएम आतिशी पर निशाना साधते हुए दिल्ली सीएम आवास को अस्थाई निवास बताते हुए आम आदमी पार्टी पर कोविड काल में इस आवास को 33 करोड़ रुपये से आलीशान बनवाने का आरोप लगाया।

अलका लांबा ने कहा, "आतिशी मार्लेना ने कहा है कि उन्हें मुख्यमंत्री आवास से निकाल दिया गया है, लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि मुख्यमंत्री आवास में कौन रहेगा और कौन नहीं, यह कोई और नहीं, दिल्ली की जनता तय करती है। यह हमेशा से तय होता आया है। दूसरी बात, मुख्यमंत्री आवास स्थायी नहीं होता। यह सब अस्थायी होते हैं। इनमें साहिब सिंह वर्मा, मदन लाल खुराना, सुषमा स्वराज, शीला दीक्षित और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं ने रहते हुए कार्य किया। यह एक अस्थायी घर है, लेकिन दुख की बात है कि उस समय, जब कोरोना महामारी में लोग ऑक्सीजन के लिए तड़प रहे थे, अस्पतालों में बिस्तर नहीं मिल रहे थे। उस समय आपने मुख्यमंत्री आवास पर 33 करोड़ रुपये खर्च किए।"

उन्होंने कहा, "आतिशी से कहिए कि भावुकता की राजनीति न करें, क्योंकि हम महिला नेता हैं और हमें अपनी आवाज उठाने का अधिकार है। अगर किसी ने उनका अपमान किया है, तो उन्हें मुंहतोड़ जवाब देने का हक है। वे महिला हैं और किसी भी महिला के सम्मान की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।"

उन्होंने कहा, "मैं आपको यह भी याद दिलाना चाहूंगा कि भाजपा के विधायक ओपी शर्मा ने मुझे कुछ कह दिया था। मैंने उन्हें सदन में बैठने नहीं दिया। अलका लांबा ने एक साल के लिए बीजेपी के विधायक ओपी शर्मा को सदन से निलंबित करा दिया था और अदालत से भी उन्हें राहत नहीं मिली थी। आज, उसी तरह का अपमान आतिशी मार्लेना का हो रहा है। यह अपमान अरविंद केजरीवाल कर रहे हैं। केजरीवाल उन्हें 'टीसीएम' कह रहे हैं। टीसीएम का मतलब टेंपरेरी सीएम। उन्हें टीसीएम कहना असंवेदनशीलता की मिसाल है।"

अंत में उन्होंने कहा, "आतिशी को कहिए कि उन्हें चुप नहीं रहना चाहिए। अगर वे भावुक होती हैं, तो वे यह समझें कि महिलाएं मैदान में उतरती हैं और आधी आबादी को आवाज देती हैं। हमें घर, मोहल्ला, परिवार से कितना कुछ सुनना पड़ता है, लेकिन हमें अपनी लड़ाई नहीं छोड़नी चाहिए। आतिशी को कहूंगी कि वह संघर्ष करें, क्योंकि मैं उनके साथ खड़ी हूं।"


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