तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: मजबूत गठबंधन के साथ कांग्रेस ने जल्द सीट बंटवारे पर दिया जोर
डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन के भीतर कांग्रेस ने इस बार चुनावों को लेकर शुरुआती और संगठित पहल की है।

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव अप्रैल में होने की संभावना के बीच राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सभी प्रमुख दल गठबंधन मजबूत करने और सीटों के बंटवारे को लेकर सक्रिय हो गए हैं। शुरुआती बातचीत से आगे बढ़ते हुए अब ठोस रणनीतियों पर काम शुरू हो चुका है और मुकाबला हाई-स्टेक्स होने के संकेत दे रहा है।
डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन के भीतर कांग्रेस ने इस बार चुनावों को लेकर शुरुआती और संगठित पहल की है। करीब ढाई महीने पहले ही पार्टी ने सीट शेयरिंग और सहयोगी दलों से समन्वय के लिए एक विशेष समिति का गठन कर दिया था।
इस कदम को कांग्रेस की उस रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके तहत वह अंतिम समय की असमंजस की स्थिति से बचते हुए गठबंधन में अपनी मजबूत भूमिका सुनिश्चित करना चाहती है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने डीएमके नेतृत्व से जल्द से जल्द औपचारिक सीट बंटवारे की बातचीत शुरू करने का आग्रह किया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, विधानसभा सीटों को लेकर समय रहते स्पष्टता मिलने से कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर बेहतर तैयारी का मौका मिलेगा, संगठनात्मक मजबूती आएगी और चुनाव प्रचार को गति मिलेगी।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अगर इसमें देरी हुई तो बूथ स्तर की योजना प्रभावित हो सकती है और ऐसे समय में गति कमजोर पड़ सकती है, जब प्रतिद्वंद्वी गठबंधन पहले से ही अपनी तैयारियां तेज कर चुके हैं।
इसके साथ ही कांग्रेस ने सुझाव दिया है कि डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस के सभी घटक दलों के नेता सामूहिक बैठक करें और सार्वजनिक रूप से एकजुटता का प्रदर्शन करें।
पार्टी नेताओं का मानना है कि इस तरह का शक्ति प्रदर्शन मतदाताओं को मजबूत संदेश देगा और जमीनी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरेगा। उन्होंने हाल ही में मदुरै में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं की बैठक का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह की दृश्य एकजुटता राजनीतिक माहौल को प्रभावित करती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तमिलनाडु में गठबंधन का समय रहते तालमेल चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। सीटों का स्पष्ट बंटवारा, संयुक्त प्रचार और एकजुट संदेश वोटों के बिखराव को रोकने और क्षेत्रीय समर्थन को मजबूत करने में अहम माने जाते हैं।
जैसे-जैसे अप्रैल नजदीक आ रहा है, आने वाले हफ्तों में तेज बातचीत, रणनीतिक बैठकों और सार्वजनिक रैलियों का दौर और तेज होने की संभावना है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही गठबंधन आक्रामक रूप से मैदान में उतर चुके हैं। ऐसे में तमिलनाडु की राजनीति एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही है।
कांग्रेस के लिए सीट बंटवारे की बातचीत जल्दी शुरू करना सिर्फ रणनीति नहीं, बल्कि सत्ता की लड़ाई में निर्णायक भूमिका निभाने की तैयारी का संकेत भी माना जा रहा है।


