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केजरीवाल पर कमलजीत सहरावत का पलटवार, कहा- 10 साल में क्या किया, बताएं

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को दिल्ली के जाट समुदाय को आरक्षण दिए जाने का मुद्दा उठाया

केजरीवाल पर कमलजीत सहरावत का पलटवार, कहा- 10 साल में क्या किया, बताएं
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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को दिल्ली के जाट समुदाय को आरक्षण दिए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जाट समाज को पिछले 10 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी द्वारा धोखा मिल रहा है। इस दौरान केजरीवाल ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने जाट समुदाय के साथ जो वादे किए थे, उन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया है। इस पर पश्चिमी दिल्ली से भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने केजरीवाल को दूसरों पर आरोप लगाने की बजाय खुद का रिपोर्ट कार्ड देने की नसीहत दी।

उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "अरविंद केजरीवाल समाज में नई-नई भ्रांतियां फैलाना चाहते हैं। उनका पिछले 10 साल का ट्रैक रिकॉर्ड सही नहीं है। पहले वह यह बताएं कि उन्होंने 10 सालों में क्या किया है। दिल्ली को साफ पीने का पानी नहीं दिया। यमुना को साफ नहीं किया। बुजुर्गों को पेंशन नहीं दी। गरीबों को राशन कार्ड नहीं दिया। गली-नाली सड़क टूटे पड़े हैं।"

उन्होंने कहा, "उन्होंने दिल्ली को प्रदूषण का शहर बना दिया। उनसे इतना ही कहना चाहती हूं कि आप केंद्र सरकार की चिंता न करें, न ही आप जाटों की चिंता करें। जाटों को पता है कि उनके क्षेत्र के लिए कौन विकास का काम कर रहा है। जाट उनके प्रति वफादार हैं। दिल्ली में विपक्षी पार्टियों के गठबंधन के बावजूद विपक्षी पार्टियों के सभी सातों प्रत्याशी जीत के आए हैं। इसमें मैं और योगेंद्र चंदोलिया प्रमुख रूप से जाटों के क्षेत्र से हैं। मैं अरविंद केजरीवाल से इतना ही कहना चाहूंगी कि वह अपना रिपोर्ट कार्ड दें, दूसरों की कमियां न निकालें।"

बता दें कि केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार के किसी भी कॉलेज, विश्वविद्यालय या संस्था में दिल्ली के जाट समुदाय को आरक्षण नहीं मिलता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को दिल्ली के जाटों की याद केवल चुनाव से पहले ही आती है। केजरीवाल ने यह भी बताया कि दिल्ली में राजस्थान के जाट समुदाय को आरक्षण मिलता है, जबकि दिल्ली के जाटों को यह अधिकार नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दिल्ली की राज्य ओबीसी सूची में पांच जातियां हैं, जो केंद्र की ओबीसी सूची में शामिल नहीं हैं।


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