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दिल्ली के लोगों पर हुए अन्याय के खिलाफ कांग्रेस 'न्याय यात्रा' निकाल रही है : पवन खेड़ा

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोमवार को आईएएनएस से बात की। उन्होंने कांग्रेस की ‘न्याय यात्रा’ और वायनाड लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रियंका गांधी के नामांकन के दौरान दिए एफिडेविट पर भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है

दिल्ली के लोगों पर हुए अन्याय के खिलाफ कांग्रेस न्याय यात्रा निकाल रही है : पवन खेड़ा
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नई दिल्ली। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोमवार को आईएएनएस से बात की। उन्होंने कांग्रेस की ‘न्याय यात्रा’ और वायनाड लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रियंका गांधी के नामांकन के दौरान दिए एफिडेविट पर भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है।

कांग्रेस द्वारा न्याय यात्रा निकालने के पीछे उद्देश्य क्या है? इस पर कांग्रेस नेता ने कहा, पिछले 10 सालों में दिल्ली के साथ जो अन्याय हुआ है, चाहे वह केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा हो या राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा किया गया हो, न्याय यात्रा के माध्यम से उसका विरोध किया जा रहा है। न्याय यात्रा को दिल्ली के लोग बहुत उम्मीदों के साथ देख रहे हैं।

प्रियंका गांधी पर अपनी संपत्ति के बारे में पूरी जानकारी न देने के भाजपा के आरोप पर कांग्रेस नेता ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, वह चुनौती दें, हम जवाब देंगे। आरोप लगाकर भागने का क्या औचित्य है।

बता दें कि 26 अक्टूबर को भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने केरल के वायनाड से कांग्रेस की लोकसभा उम्मीदवार प्रियंका गांधी वाड्रा के हलफनामे पर सवाल उठाए थे। भाटिया ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, हर उम्मीदवार को अपने आपराधिक इतिहास के साथ ही अपने और अपने जीवनसाथी की संपत्तियों तथा देनदारियों की जानकारी देनी होती है। लेकिन, प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसे लेकर अपने हलफनामे में विस्तृत विवरण नहीं दिया है, कई जानकारियों और तथ्यों को छुपाया है। हलफनामे में नेशनल हेराल्ड मामले का जिक्र नहीं है। वह ट्रस्ट के माध्यम से जो शेयर होल्ड करती हैं, उसके बारे में नहीं बताया गया है। हलफनामे में यह कहा गया है कि उनके पति तीन कंपनियों में पार्टनर हैं, जबकि वह पांच कंपनियों में पार्टनर हैं।

गौरव भाटिया ने इसे गंभीर मसला बताते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति अपने हलफनामे में तथ्यों को छुपाता है या गलत जानकारी देता है तो उनको चुनाव लड़ने का कोई हक नहीं है।


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