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आरक्षण को 50 फीसद की कानूनी सीमा से आगे ले जाने का प्रयास : कांग्रेस

कांग्रेस का प्रयास रहेगा कि भविष्य में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो

आरक्षण को 50 फीसद की कानूनी सीमा से आगे ले जाने का प्रयास : कांग्रेस
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नई दिल्ली। कांग्रेस का प्रयास रहेगा कि भविष्य में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो। पार्टी का प्रयास रहेगा कि दलितों, पिछड़ों व आदिवासियों के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई 50 प्रतिशत की आरक्षण सीमा को अलग कर इन वर्गों को और अधिक सुविधा दी जा सके। यह बात कांग्रेस सांसद मुकुल बालकृष्ण वासनिक ने राज्यसभा में कही।

मुकुल वासनिक ने 'संविधान पर चर्चा' के दौरान कहा कि भारत के संविधान के निर्माण में व भारत के स्वाधीनता संग्राम से सत्ता में बैठे लोगों का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है, लेकिन आज जिस तरह से यहां पर सत्ता पक्ष के लोग अपनी बात रख रहे हैं, ऐसा लगता है कि संविधान भी उन्होंने ही बनाया और भारत की आजादी भी उन्होंने ही हासिल की।

मुकुल वासनिक ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी हुई कि सत्ता पक्ष के लोगों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के लिए अच्छी बातें कही। मुझे इस बात की भी खुशी हुई कि सत्ता दल के लोगों ने सरदार पटेल का नाम भी बड़े सम्मान के साथ यहां लिया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण व हरदीप सिंह पुरी का नाम लेते हुए कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू जी के बारे में इतनी घृणा और द्वेष भरे विचार सत्ता पक्ष में क्यों नजर आता है। उन्होंने इस पर हैरानी भी जताई।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि क्या जवाहरलाल नेहरू का यह अपराध था कि उन्होंने आजादी की लड़ाई में 9 साल से अधिक समय जेल में बिताए। क्या जवाहरलाल नेहरू का यह अपराध था कि उन्होंने लाहौर में रावी के तट पर भारत का ध्वज लहराया था और इस बात का ऐलान किया था कि अब हम पूर्ण स्वराज के लिए तैयार है, उनका संघर्ष पूर्ण स्वराज हासिल किए बगैर रुकेगा नहीं। क्या जवाहरलाल नेहरू का यह अपराध था कि उन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण की नींव रखी।

वासनिक ने कहा, मैं समझता हूं कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के लिए यह घृणा और द्वेष इसलिए है कि जब देश का विभाजन हुआ, इस्लाम के नाम पर जब पाकिस्तान बना, तब हिंदुस्तान में भी कुछ लोग हिंदू भारत के निर्माण करने के पक्षधर थे, जिसके खिलाफ जवाहरलाल नेहरू ने पूरी ताकत झोंक दी। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान पांच लाख से अधिक लोगों की मौत हुई और 60 लाख से अधिक लोगों का विस्थापन हुआ। तब, प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू अपने साथियों सरदार पटेल, मौलाना आजाद, राजेंद्र प्रसाद के साथ देश में शांति स्थापित करने का काम कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि कश्मीर के हालात चिंताजनक हो गए थे, ऐसे हालात में जवाहरलाल नेहरू और देश की पहली सरकार ने जो फैसले लिए, मैं समझता हूं कि उन फैसलों को बड़े सम्मान के साथ यहां याद करने की आवश्यकता है। लेकिन, मैं नहीं समझता कि इस संदर्भ में सत्ता पक्ष से बहुत ज्यादा उम्मीद करना मुनासिब होगा। बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान सभा में बहस का जवाब देते हुए कहा था संविधान सभा में आने के पीछे उनका उद्देश्य अनुसूचित जातियों के अधिकारों की रक्षा करना था।

उन्होंने कहा कि अंग्रेज कहते थे हिंदुस्तान राष्ट्र नहीं बन सकता। हिंदुस्तान भौगोलिक अभिव्यक्ति है। इतनी भाषाएं, इतने रीति-रिवाज, इतने धर्म हैं। लेकिन, हमारा स्वाधीनता आंदोलन सेकुलर था, यह आंदोलन गरीबों समेत सभी लोगों को साथ में लेकर भारत के निर्माण में लगा था।


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