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NADA के निशाने पर यशस्वी जायसवाल और शेफाली वर्मा, इस बात के लिए भेजा नोटिस; बढ़ी मुश्किलें

रिपोर्ट के मुताबिक, यशस्वी जायसवाल और शेफाली वर्मा दोनों NADA के रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल (RTP) का हिस्सा हैं। RTP में शामिल खिलाड़ियों को सालभर अपने ठिकाने और समय की जानकारी पहले से देनी होती है ताकि डोप कंट्रोल अधिकारी (DCO) कभी भी जाकर उनका टेस्ट कर सकें।

NADA के निशाने पर यशस्वी जायसवाल और शेफाली वर्मा, इस बात के लिए भेजा नोटिस; बढ़ी मुश्किलें
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नई दिल्‍ली: आईपीएल 2026 के रोमांच के बीच भारतीय क्रिकेट से जुड़ी एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने खेल जगत में हलचल बढ़ा दी है। टीम इंडिया और राजस्थान रॉयल्स के युवा ओपनर यशस्वी जायसवाल और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार बल्लेबाज शेफाली वर्मा का नाम डोप टेस्ट विवाद में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों खिलाड़ी नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (NADA) के तय नियमों के तहत होने वाले डोप टेस्ट के लिए निर्धारित स्थान पर मौजूद नहीं थे। इसके बाद एजेंसी ने दोनों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि फिलहाल यह मामला शुरुआती स्तर पर है और दोनों खिलाड़ियों पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, लेकिन इस खुलासे ने भारतीय क्रिकेट में एंटी-डोपिंग सिस्टम को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट के मुताबिक, यशस्वी जायसवाल और शेफाली वर्मा दोनों NADA के रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल (RTP) का हिस्सा हैं। RTP में शामिल खिलाड़ियों को सालभर अपने ठिकाने और समय की जानकारी पहले से देनी होती है ताकि डोप कंट्रोल अधिकारी (DCO) कभी भी जाकर उनका टेस्ट कर सकें। जानकारी के अनुसार, 17 दिसंबर को डोप कंट्रोल अधिकारी यशस्वी जायसवाल का टेस्ट लेने पहुंचे थे, लेकिन वह अपने बताए गए स्थान पर मौजूद नहीं मिले। इसी तरह 7 नवंबर को शेफाली वर्मा भी उस जगह पर नहीं मिलीं, जिसकी जानकारी उन्होंने एजेंसी को दी थी। इस कारण दोनों खिलाड़ियों का डोप टेस्ट नहीं हो सका।

नोटिस का जवाब भी नहीं दिया

मामला सिर्फ टेस्ट मिस करने तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि NADA ने दोनों खिलाड़ियों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा था। यशस्वी को 18 फरवरी और शेफाली को 20 फरवरी तक अपना स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया था, लेकिन दोनों की ओर से तय समय सीमा में कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद NADA ने दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ ‘व्हेयरअबाउट फेलियर’ के तहत ‘मिस टेस्ट’ दर्ज कर लिया। एजेंसी ने अब एक बार फिर नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है। साथ ही इस पूरे मामले की जानकारी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को भी भेजी गई है।

क्या होता है ‘Whereabout Clause’?

डोपिंग रोकने के लिए WADA और NADA ने खिलाड़ियों के लिए कुछ सख्त नियम बनाए हैं। RTP में शामिल खिलाड़ियों को हर दिन एक निश्चित समय और स्थान बताना होता है, जहां वे टेस्ट के लिए उपलब्ध रहेंगे। अगर अधिकारी वहां पहुंचते हैं और खिलाड़ी नहीं मिलता, तो इसे ‘Whereabout Failure’ माना जाता है। इस नियम का मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि खिलाड़ी कभी भी अचानक टेस्ट के लिए उपलब्ध रहें और डोपिंग जैसी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।

क्या यशस्वी और शेफाली पर लगेगा बैन?

फिलहाल दोनों खिलाड़ियों पर किसी तरह की बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। नियमों के मुताबिक, RTP में शामिल किसी खिलाड़ी के खिलाफ 12 महीनों के भीतर तीन बार ‘मिस टेस्ट’ या ‘व्हेयरअबाउट फेलियर’ दर्ज होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू होती है। अगर कोई खिलाड़ी तीन बार टेस्ट मिस करता है, तो उसे NADA के सामने अपनी सफाई पेश करनी होती है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर खिलाड़ी पर अधिकतम दो साल तक का प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इस समय यशस्वी जायसवाल और शेफाली वर्मा के खिलाफ सिर्फ एक-एक ‘मिस टेस्ट’ दर्ज हुआ है। इसलिए तत्काल बैन या निलंबन जैसी स्थिति नहीं बनी है।

BCCI और ICC की भी बढ़ी चिंता

इस मामले के सामने आने के बाद BCCI और ICC भी सतर्क हो गए हैं। भारतीय क्रिकेट में डोपिंग से जुड़े मामले पहले भी सामने आते रहे हैं, लेकिन किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी का नाम इस तरह के विवाद में आना काफी गंभीर माना जा रहा है। चूंकि भारतीय क्रिकेट अब पूरी तरह WADA के नियमों के तहत काम करता है, इसलिए खिलाड़ियों के लिए एंटी-डोपिंग प्रोटोकॉल का पालन करना बेहद जरूरी हो गया है। खासतौर पर ऐसे समय में जब IPL जैसे बड़े टूर्नामेंट चल रहे हों, खिलाड़ियों की गतिविधियों पर नजर और भी बढ़ जाती है।

दोनों खिलाड़ी इस समय शानदार फॉर्म में

यशस्वी जायसवाल इस समय IPL 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और टीम इंडिया के भविष्य के बड़े सितारों में गिने जाते हैं। वहीं शेफाली वर्मा भी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में शामिल हैं।

ऐसे में यह विवाद उनके करियर के लिए चिंता जरूर पैदा करता है, लेकिन फिलहाल मामला केवल प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन तक सीमित है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों खिलाड़ी NADA को क्या जवाब देते हैं और आगे एजेंसी इस मामले में क्या फैसला लेती है।


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