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क्रिकेट जगत ने खोया अपना महानतम ऑलराउंडर, 89 वर्ष की उम्र में सर गैरी सोबर्स का निधन

28 जुलाई 1936 को बारबाडोस के सेंट माइकल में जन्मे सर गैरी सोबर्स का पूरा नाम गारफील्ड सेंट ऑबर्न सोबर्स था। उनका बचपन बेहद संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में बीता। जब वह केवल पांच वर्ष के थे, तब द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनके पिता, जो कनाडाई मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे, जर्मन हमले में मारे गए।

क्रिकेट जगत ने खोया अपना महानतम ऑलराउंडर, 89 वर्ष की उम्र में सर गैरी सोबर्स का निधन
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ब्रिजटाउन : Sir Gary Sobers Passes Way: विश्व क्रिकेट के इतिहास में सबसे महान ऑलराउंडरों में शुमार सर गैरी सोबर्स का शुक्रवार को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि की है। हालांकि, बोर्ड ने उनकी मृत्यु के कारणों का खुलासा नहीं किया। उनके निधन की खबर सामने आते ही विश्व क्रिकेट में शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व और वर्तमान खिलाड़ियों, क्रिकेट प्रशासकों तथा प्रशंसकों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए खेल जगत की अपूरणीय क्षति बताया। सर गैरी सोबर्स ने अपने शानदार करियर में बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण तीनों विभागों में ऐसी छाप छोड़ी, जिसने उन्हें क्रिकेट इतिहास के सबसे संपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल कर दिया।

बारबाडोस की धरती से शुरू हुआ सुनहरा सफर

28 जुलाई 1936 को बारबाडोस के सेंट माइकल में जन्मे सर गैरी सोबर्स का पूरा नाम गारफील्ड सेंट ऑबर्न सोबर्स था। उनका बचपन बेहद संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में बीता। जब वह केवल पांच वर्ष के थे, तब द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनके पिता, जो कनाडाई मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे, जर्मन हमले में मारे गए। इसके बाद उनकी मां थेल्मा ने अकेले छह बच्चों का पालन-पोषण किया। अपनी आत्मकथा में सोबर्स ने लिखा था कि कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद उनकी मां ने कभी बच्चों की शिक्षा और परवरिश में कमी नहीं आने दी।

जन्म से ही थे अनोखे

सोबर्स का जन्म दोनों हाथों में एक-एक अतिरिक्त अंगुली के साथ हुआ था। बचपन में उन्होंने स्वयं ही इन अतिरिक्त अंगुलियों को हटवा लिया। यह उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास का शुरुआती उदाहरण माना जाता है। बचपन में वह समुद्र तटों और गलियों में स्थानीय शैली के क्रिकेट से खेल की बारीकियां सीखते थे। यही जुनून आगे चलकर उन्हें विश्व क्रिकेट का महान सितारा बना गया।

कम उम्र में बनाया विश्व रिकॉर्ड

सिर्फ 16 वर्ष की आयु में उन्होंने बारबाडोस की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया। इसके दो वर्ष बाद, 1954 में उन्होंने वेस्टइंडीज के लिए टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा। महज 21 वर्ष की उम्र में पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 365 रन बनाकर उन्होंने उस समय टेस्ट क्रिकेट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर बनाया। यह रिकॉर्ड कई वर्षों तक कायम रहा। आज भी वह टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले सबसे युवा बल्लेबाजों में शामिल हैं।

हर विभाग में थे बेमिसाल

सर गैरी सोबर्स केवल महान बल्लेबाज ही नहीं थे, बल्कि गेंदबाजी में भी उनकी बहुमुखी प्रतिभा अद्भुत थी। वह बाएं हाथ से तेज गेंदबाजी के साथ-साथ स्पिन गेंदबाजी भी कर सकते थे। इसके अलावा मैदान के किसी भी हिस्से में उनका क्षेत्ररक्षण शानदार माना जाता था। उनकी इसी बहुमुखी क्षमता ने उन्हें क्रिकेट इतिहास का सबसे संपूर्ण ऑलराउंडर बना दिया। प्रतिष्ठित विजडन क्रिकेट अल्मनैक ने उन्हें 20वीं सदी के पांच महानतम क्रिकेटरों में स्थान दिया था, जबकि महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन ने उन्हें अपने दौर का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर बताया था।

पहले बल्लेबाज जिन्होंने लगाए छह गेंदों पर छह छक्के

साल 1968 में इंग्लैंड के घरेलू क्रिकेट में नॉटिंघमशायर की ओर से खेलते हुए सर गैरी सोबर्स ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। उन्होंने ग्लैमरगन के गेंदबाज मैल्कम नैश के एक ओवर की सभी छह गेंदों पर लगातार छह छक्के जड़ दिए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में यह कारनामा करने वाले वह दुनिया के पहले बल्लेबाज बने। यह रिकॉर्ड आज भी क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार उपलब्धियों में गिना जाता है।

नाइटहुड से लेकर राष्ट्रीय सम्मान तक

क्रिकेट में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए वर्ष 1975 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने उन्हें 'नाइटहुड' की उपाधि से सम्मानित किया। इसके बाद वह आधिकारिक रूप से सर गैरी सोबर्स कहलाए। वर्ष 1998 में उन्हें बारबाडोस के दस आधिकारिक राष्ट्रीय नायकों में शामिल किया गया। उनके सम्मान में सर गारफील्ड सोबर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण भी किया गया। दक्षिण अफ्रीका के महान नेता नेल्सन मंडेला भी उन्हें अपने पसंदीदा क्रिकेटरों में गिनते थे।

क्रिकेट जगत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

सर गैरी सोबर्स के निधन पर भारत सहित दुनिया भर के क्रिकेट जगत ने गहरा शोक व्यक्त किया। पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने कहा कि क्रिकेट ने अपना सबसे महान खिलाड़ी खो दिया है। उनके अनुसार, सोबर्स वही खिलाड़ी थे, जैसा बनने का सपना हर बच्चा बल्ला या गेंद हाथ में लेने के बाद देखता है।

आईसीसी के चेयरमैन जय शाह ने उन्हें विश्व क्रिकेट का सच्चा लीजेंड बताते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। उन्होंने याद दिलाया कि आईसीसी ने वर्ष के सर्वश्रेष्ठ पुरुष क्रिकेटर के पुरस्कार का नाम भी सर गैरी सोबर्स के सम्मान में रखा है। पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने इसे क्रिकेट जगत की अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि उनका कौशल खिलाड़ियों के लिए प्रतिभा का पैमाना था।

भारत के महान स्पिनर बीएस चंद्रशेखर ने कहा कि सोबर्स उनके खिलाफ खेलने वाले सबसे बेहतरीन बल्लेबाज थे। उनके अनुसार, सोबर्स हर तरह की गेंदबाजी को आसानी से समझ लेते थे और निस्संदेह क्रिकेट इतिहास के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर थे।

एक ऐसा नाम जो हमेशा अमर रहेगा

सर गैरी सोबर्स ने अपने खेल, व्यक्तित्व और उपलब्धियों से क्रिकेट को नई पहचान दी। उन्होंने यह साबित किया कि एक खिलाड़ी केवल रिकॉर्ड से नहीं, बल्कि अपने प्रभाव, खेल भावना और प्रेरणा से महान बनता है। उनका निधन क्रिकेट जगत के लिए अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।


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