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पीएम मोदी ने 51वीं प्रगति बैठक की अध्यक्षता की, रूफटॉप सोलर को मिशन मोड में लागू करने पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक 'सेवा तीर्थ' में आयोजित हुई

पीएम मोदी ने 51वीं प्रगति बैठक की अध्यक्षता की, रूफटॉप सोलर को मिशन मोड में लागू करने पर जोर
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक 'सेवा तीर्थ' में आयोजित हुई, जहां केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति और समय पर क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।

बैठक में रेलवे, बिजली और सड़क क्षेत्र से जुड़े सात बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की गई, जिनकी कुल लागत करीब 30 हजार करोड़ रुपये है। ये परियोजनाएं देश के 9 राज्यों में चल रही हैं।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की भी विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा रिवर इंटरलिंकिंग प्रोजेक्ट दूसरे राज्यों के लिए भी एक मॉडल बनना चाहिए, ताकि राज्यों के बीच जल विवादों का समाधान सहयोग और आपसी समझ से हो सके।

प्रधानमंत्री ने राज्यों से कहा कि वे नदी जोड़ो परियोजनाओं, जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और बेहतर सिंचाई जैसी योजनाओं को एकीकृत तरीके से आगे बढ़ाएं, ताकि लंबे समय तक जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने शहरों, रिहायशी इलाकों और सार्वजनिक संस्थानों में रूफटॉप सोलर को मिशन मोड में लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे बिजली का खर्च कम होगा, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री ने नहरों के ऊपर और किनारों पर सोलर पैनल लगाने की संभावनाएं तलाशने को भी कहा।

सड़क और पोर्ट कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वधावन बंदरगाह को केवल एक बंदरगाह नहीं, बल्कि देश के बड़े मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना कोस्टल शिपिंग, इनलैंड वाटरवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, हाई-स्पीड रेल, हाईवे और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से जुड़ी राष्ट्रीय गेटवे के रूप में तैयार होनी चाहिए।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अभियान सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके नतीजे जमीन पर दिखाई देने चाहिए। उन्होंने राज्यों को ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़े प्रोजेक्ट्स, वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट्स और गोबरधन प्लांट्स को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सार्वजनिक परियोजनाओं में देरी से न सिर्फ लागत बढ़ती है, बल्कि लोगों को जरूरी सुविधाएं समय पर नहीं मिल पातीं। उन्होंने मंत्रालयों, विभागों और राज्यों से लंबित मुद्दों को तेजी से सुलझाने और समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने की अपील की।

बैठक की शुरुआत में कैबिनेट सचिव ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर अब राज्यों में सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा की नई व्यवस्था शुरू की गई है।


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