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नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स से बाहर, अब भारत को किससे होगी आस?

20वां एशियन गेम्स 19 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच जापान के आइची-नागोया में आयोजित होंगे, जिससे पहले भारत को बड़ा झटका लगा है। दो बार के ओलंपिक मेडलिस्ट स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा टखने की चोट के शेष सीजन से बाहर हो गए हैं।

नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स से बाहर, अब भारत को किससे होगी आस?
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नई दिल्ली। 20वां एशियन गेम्स 19 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच जापान के आइची-नागोया में आयोजित होंगे, जिससे पहले भारत को बड़ा झटका लगा है। दो बार के ओलंपिक मेडलिस्ट स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा टखने की चोट के शेष सीजन से बाहर हो गए हैं।

2026 का सीजन चोपड़ा के लिए पहले से ही मुश्किल भरा रहा। पिछले साल सितंबर से पीठ के निचले हिस्से की चोट से परेशान होने के कारण उनकी वापसी जून तक टल गई थी। हालांकि, पूरी तरह फिट न होने के बावजूद भारतीय स्टार ने कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल (85.83 मीटर) जीतने के बाद लुसाने डायमंड लीग में 88.05 मीटर दूरी तय करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया।

अगले महीने के आखिर में जापान में शुरू होने जा रहे एशियन गेम्स पर ध्यान देने से पहले, वह पहली वर्ल्ड एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप में भी हिस्सा लेने वाले थे, लेकिन अब यह संभव न होगा। इस चोट के कारण नीरज 5 सितंबर को ब्रुसेल्स में होने वाले डायमंड लीग फाइनल और 11 से 13 सितंबर के बीच वर्ल्ड एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप में भी हिस्सा नहीं ले सकेंगे।

ऐसे में सवाल उठते हैं कि नीरज के स्थान पर अब किस जैवलिन थ्रोअर से भारत को एशियन गेम्स 2026 में आस होगी?

एशियन गेम्स 2026 के पुरुष वर्ग में इस इवेंट से भारत को अब रोहित यादव से उम्मीदें होंगी। बड़े मंच पर प्रदर्शन का अनुभव रखने वाले रोहित से एशियन गेम्स में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद होगी, जिन्होंने हाल ही में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सभी को प्रभावित किया था।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित अदारी-डभिया गांव रोहित यादव कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 81.56 मीटर के साथ सातवें स्थान पर रहे। रोहित ने भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स सिल्वर लेवल कॉन्टिनेंटल टूर इवेंट में 87.68 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए गोल्ड जीता था। अब एशियन गेम्स जैसा बड़ा मंच उनके लिए खुद को साबित करने का बेहतरीन मौका होगा।

रोहित यादव भारतीय जैवलिन में लंबे समय से अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो वह 87 मीटर से ज्यादा दूरी तक भाला फेंक चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रतिस्पर्धा करते रहे हैं। नीरज की अनुपस्थिति में रोहित के पास सिर्फ पदक जीतने का मौका नहीं, बल्कि भारतीय जैवलिन में अपनी जगह और मजबूत करने का भी सुनहरा अवसर होगा।

बेशक, नीरज की गैरमौजूदगी से रोहित पर सीधे तौर पर उनकी जगह भरने का दबाव नहीं होना चाहिए। नीरज का स्तर अलग है और उनकी गैरमौजूदगी में किसी एक खिलाड़ी से वैसा प्रदर्शन दोहराने की उम्मीद करना सही नहीं होगा। इसके बजाय उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए भारत की पदक दावेदारी मजबूत करनी होगी।

रोहित की सबसे बड़ी ताकत उनका अनुभव है, जिनके लिए ऐसे बड़े टूर्नामेंट में दबाव को संभालना और क्वालिफिकेशन के बाद फाइनल में अपनी लय बनाए रखना उनके लिए महत्वपूर्ण होगा। अगर रोहित अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ के आसपास या उससे बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहे, तो यकीनन एशियन गेम्स 2026 में पदक की दौड़ में बने रह सकते हैं।


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