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लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने बीसीसीआई कमेंट्री पैनल से लिया संन्यास, अवसरों की कमी और रंगभेद के लगाए आरोप
60 वर्षीय शिवरामकृष्णन ने अपने पोस्ट में लिखा, मैं बीसीसीआई के लिए कमेंट्री से संन्यास ले रहा हूं। पिछले 23 वर्षों से मुझे टॉस और पुरस्कार वितरण समारोह के लिए नहीं भेजा गया।

नई दिल्ली: भारत के पूर्व लेग स्पिनर और जाने-माने क्रिकेट विश्लेषक लक्ष्मण शिवरामकृष्णन (Laxman Sivaramakrishnan) ने बीसीसीआई के कमेंट्री पैनल से हटने का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए उन्होंने अपने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से टॉस और पुरस्कार वितरण समारोह में मौका न मिलना उनके इस निर्णय की मुख्य वजह है।
‘अब कमेंट्री से संन्यास’
60 वर्षीय शिवरामकृष्णन ने अपने पोस्ट में लिखा, मैं बीसीसीआई के लिए कमेंट्री से संन्यास ले रहा हूं। पिछले 23 वर्षों से मुझे टॉस और पुरस्कार वितरण समारोह के लिए नहीं भेजा गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस दौरान नए और कम अनुभवी लोगों को लगातार पिच रिपोर्ट, टॉस और पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन जैसे महत्वपूर्ण अवसर दिए जाते रहे, जबकि उन्हें नजरअंदाज किया गया।
अवसरों में भेदभाव का आरोप
शिवरामकृष्णन ने अपने बयान में चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें उस समय भी इन जिम्मेदारियों के लिए नहीं चुना गया, जब रवि शास्त्री भारतीय टीम के कोच थे। उन्होंने इस स्थिति पर हैरानी जताते हुए पूछा कि आखिर इसके पीछे कारण क्या हो सकता है। अपने पोस्ट में उन्होंने इशारों-इशारों में भेदभाव की बात भी कही और इसे “रंगभेद” से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, उन्होंने इस संबंध में किसी विशेष व्यक्ति या संस्था का नाम नहीं लिया। उनका यह बयान क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गया है और कमेंट्री पैनल के चयन को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है।
दो दशकों का लंबा कमेंट्री करियर
लक्ष्मण शिवरामकृष्णन पिछले दो दशक से अधिक समय से क्रिकेट कमेंट्री का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2000 में कमेंट्री की दुनिया में कदम रखा और अपनी बेबाक राय तथा तकनीकी विश्लेषण के लिए खास पहचान बनाई। कमेंट्री बॉक्स में उन्हें ‘शिवा’ के नाम से जाना जाता है। उनकी शैली स्पष्ट, विश्लेषणात्मक और कभी-कभी विवादास्पद भी रही, जिससे वह दर्शकों के बीच चर्चा में बने रहते थे।
क्रिकेट करियर: कम उम्र में बनाई पहचान
शिवरामकृष्णन ने 1980 के दशक की शुरुआत में बेहद कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। मात्र 17 साल की उम्र में उन्होंने अपनी लेग स्पिन, गूगली और टॉप स्पिन से बल्लेबाजों को चकित कर दिया था। उन्होंने 1983 से 1986 के बीच भारत के लिए 9 टेस्ट मैच और 16 वनडे खेले। हालांकि उनका अंतरराष्ट्रीय करियर लंबा नहीं चला, लेकिन शुरुआती दौर में उन्होंने अपनी गेंदबाजी से खास छाप छोड़ी।
आईसीसी में भी निभाई अहम भूमिका
कमेंट्री के अलावा शिवरामकृष्णन ने प्रशासनिक स्तर पर भी योगदान दिया। उन्होंने आईसीसी क्रिकेट समिति में खिलाड़ी प्रतिनिधि के रूप में काम किया और खेल से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय रखी।
क्रिकेट जगत में प्रतिक्रिया की उम्मीद
उनके इस अचानक फैसले और लगाए गए आरोपों के बाद क्रिकेट जगत में प्रतिक्रियाएं आना तय माना जा रहा है। बीसीसीआई की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उनके आरोपों में सच्चाई है, तो यह कमेंट्री पैनल के चयन और अवसरों के वितरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
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