कर्ण शर्मा ने 38 साल की उम्र में क्रिकेट को कहा अलविदा, 19 साल के घरेलू करियर पर लगा विराम
कर्ण शर्मा का अंतरराष्ट्रीय करियर लंबा नहीं रहा, लेकिन उन्हें भारतीय क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। 2014 के शानदार आईपीएल सीजन के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली।

लखनऊ: भारतीय क्रिकेट के अनुभवी लेग स्पिनर कर्ण शर्मा ने 38 साल की उम्र में इंटरनेशनल और भारतीय घरेलू क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है। करीब दो दशक लंबे क्रिकेट करियर के बाद उन्होंने यह फैसला यूपी टी20 लीग में कानपुर सुपरस्टार्स और मेरठ मावेरिक्स के बीच 22 अगस्त को खेले गए मुकाबले के बाद लिया। कर्ण अब 25 अगस्त को लखनऊ लेग में कानपुर सुपरस्टार्स की ओर से अपना विदाई मैच खेलेंगे। संन्यास की घोषणा करते हुए कर्ण शर्मा ने अपने परिवार, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), रेलवे, उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA), आंध्र प्रदेश और विदर्भ क्रिकेट संघ समेत अपने पूरे क्रिकेट सफर में साथ देने वाले लोगों का आभार जताया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्रिकेट से पूरी तरह दूर नहीं होंगे और भविष्य में कोचिंग तथा खेल से जुड़ी अन्य जिम्मेदारियों के लिए उपलब्ध रहेंगे।
तीनों फॉर्मेट में भारत के लिए खेलने का मौका
कर्ण शर्मा का अंतरराष्ट्रीय करियर लंबा नहीं रहा, लेकिन उन्हें भारतीय क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। 2014 के शानदार आईपीएल सीजन के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली। उन्होंने बर्मिंघम में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। अपने डेब्यू मुकाबले में उन्होंने इंग्लैंड के बल्लेबाज जो रूट का महत्वपूर्ण विकेट हासिल किया। इसके बाद कर्ण को वनडे टीम में भी मौका मिला।
रोहित की 264 रन वाली पारी वाले मैच में वनडे डेब्यू
कर्ण शर्मा ने कोलकाता में श्रीलंका के खिलाफ वनडे क्रिकेट में पदार्पण किया था। यह मुकाबला भारतीय क्रिकेट इतिहास की यादगार पारियों में से एक का गवाह बना। इसी मैच में रोहित शर्मा ने 264 रन की ऐतिहासिक पारी खेलकर वनडे क्रिकेट में नया रिकॉर्ड कायम किया था। इसके बाद कर्ण शर्मा को टेस्ट क्रिकेट में भी भारत की ओर से खेलने का अवसर मिला। विराट कोहली की टेस्ट कप्तानी के शुरुआती दौर में उन्हें टीम की प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। उस मुकाबले में कर्ण ने चार विकेट हासिल किए। हालांकि, यह उनके टेस्ट करियर का पहला और आखिरी मैच साबित हुआ।
19 साल तक घरेलू क्रिकेट में सक्रिय रहे
कर्ण शर्मा ने 2007 में रेलवे के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने करीब 19 वर्षों तक घरेलू क्रिकेट में अपनी सेवाएं दीं। रेलवे के अलावा वह आंध्र और विदर्भ की टीमों का भी हिस्सा रहे। घरेलू क्रिकेट में लंबे अनुभव के साथ कर्ण ने अपनी पहचान एक उपयोगी लेग स्पिनर के रूप में बनाई। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी गेंदबाजी ने उन्हें अलग पहचान दिलाई और इसी प्रदर्शन के दम पर वह भारतीय टीम तक पहुंचे।
आईपीएल में चार बार जीती ट्रॉफी
कर्ण शर्मा का आईपीएल करियर भी खासा सफल रहा। उन्होंने अपने करियर में चार बार आईपीएल ट्रॉफी अपने नाम की। खास बात यह रही कि उन्होंने 2016 से 2018 के बीच लगातार तीन अलग-अलग फ्रेंचाइजी के साथ खिताब जीता। 2016 में वह सनराइजर्स हैदराबाद की चैंपियन टीम का हिस्सा रहे। इसके बाद 2017 में मुंबई इंडियंस और 2018 में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ उन्होंने आईपीएल ट्रॉफी जीती। इस तरह कर्ण लगातार तीन साल तीन अलग-अलग टीमों के साथ चैंपियन बनने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे।
अब कोचिंग की ओर बढ़ सकता है करियर
क्रिकेट से संन्यास के बाद कर्ण शर्मा का अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। उन्होंने खुद संकेत दिया है कि वह कोचिंग और क्रिकेट से जुड़ी अन्य जिम्मेदारियों के लिए उपलब्ध रहेंगे। 25 अगस्त को कानपुर सुपरस्टार्स के लिए उनका विदाई मुकाबला उनके लंबे क्रिकेट सफर का औपचारिक अंत होगा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सीमित अवसर मिलने के बावजूद कर्ण ने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में लगभग दो दशक तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनके संन्यास के साथ भारतीय क्रिकेट के एक अनुभवी लेग स्पिनर के करियर का अध्याय समाप्त हो जाएगा।


