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लॉर्ड्स में भारतीय महिला टीम ने रचा इतिहास, इंग्लैंड को 270 रन से हराकर 12 साल बाद जीता टेस्ट

भारतीय टीम ने इंग्लैंड की धरती पर 12 वर्षों बाद टेस्ट मैच जीतने का कारनामा भी किया। पूरे मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में शानदार प्रदर्शन किया और मेजबान टीम को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। क्रांति गौड़ प्‍लेयर ऑफ द मैच रहीं।

लॉर्ड्स में भारतीय महिला टीम ने रचा इतिहास, इंग्लैंड को 270 रन से हराकर 12 साल बाद जीता टेस्ट
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लंदन: India Women vs England Women Lords Test: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान लॉर्ड्स पर इतिहास रचते हुए इंग्लैंड को एकमात्र टेस्ट मैच में 270 रन से हराकर यादगार जीत दर्ज की। यह पहली बार था जब लॉर्ड्स में महिला टेस्ट मुकाबला आयोजित किया गया और भारत ने इस ऐतिहासिक अवसर को जीत के साथ यादगार बना दिया। इसके साथ ही भारतीय टीम ने इंग्लैंड की धरती पर 12 वर्षों बाद टेस्ट मैच जीतने का कारनामा भी किया। पूरे मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में शानदार प्रदर्शन किया और मेजबान टीम को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। क्रांति गौड़ प्‍लेयर ऑफ द मैच रहीं।

पहली पारी में स्मृति, हरमन और दीप्ति ने रखी मजबूत नींव

टॉस के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने अपनी पहली पारी में 285 रन बनाए। सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने 83 रनों की संयमित और आकर्षक पारी खेलकर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 58 रन जोड़कर मध्यक्रम को संभाला, जबकि ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने 57 रन बनाकर स्कोर को प्रतिस्पर्धी बनाया। 285 रनों के जवाब में इंग्लैंड की बल्लेबाजी भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और पूरी टीम 170 रन पर सिमट गई। तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 37 रन देकर पांच विकेट झटके और लॉर्ड्स के ऑनर बोर्ड पर अपना नाम दर्ज कराया। सायली सतघरे और स्नेह राणा ने भी दो-दो विकेट लेकर इंग्लैंड की पारी को जल्दी समेटने में अहम भूमिका निभाई।

यस्तिका भाटिया के शतक से बना विशाल स्कोर

पहली पारी में 115 रन की बढ़त हासिल करने के बाद भारतीय टीम ने दूसरी पारी में भी दमदार बल्लेबाजी की। इस बार विकेटकीपर बल्लेबाज यस्तिका भाटिया जीत की सबसे बड़ी नायिका बनकर उभरीं। यस्तिका ने 158 गेंदों पर शानदार 113 रन बनाते हुए टेस्ट करियर का यादगार शतक जड़ा। दूसरी ओर स्मृति मंधाना ने एक बार फिर शानदार बल्लेबाजी करते हुए 70 रन बनाए। ऋचा घोष ने तेज अंदाज में 52 गेंदों पर 50 रन जोड़कर टीम की बढ़त को और मजबूत किया। भारत ने सात विकेट पर 341 रन बनाकर पारी घोषित की और इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 457 रनों का मुश्किल लक्ष्य रखा।

सोफी एक्लेस्टोन का संघर्ष बेकार

इंग्लैंड की अनुभवी स्पिनर सोफी एक्लेस्टोन ने भारतीय बल्लेबाजों को रोकने की भरपूर कोशिश की। उन्होंने दूसरी पारी में 33.3 ओवर गेंदबाजी करते हुए 118 रन देकर पांच विकेट लिए, जो उनके टेस्ट करियर का चौथा पांच विकेट हॉल रहा। पूरे मैच में एक्लेस्टोन ने कुल आठ विकेट हासिल किए, लेकिन उनके शानदार प्रदर्शन के बावजूद इंग्लैंड की टीम हार टालने में सफल नहीं हो सकी।

457 रन का लक्ष्य बना पहाड़

विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही। क्रांति गौड़ ने पहले ही ओवर में सलामी बल्लेबाज टैमी ब्यूमोंट को बिना खाता खोले बोल्ड कर दिया। यह ब्यूमोंट के अंतरराष्ट्रीय करियर की अंतिम पारी भी थी और भारतीय खिलाड़ियों ने उन्हें मैदान से विदा होने पर 'गार्ड ऑफ ऑनर' देकर सम्मानित किया। इसके बाद क्रांति ने इंग्लैंड की पूर्व कप्तान हीदर नाइट को भी जल्द पवेलियन भेज दिया। नाइट ने भी इस टेस्ट के बाद संन्यास लेने का फैसला किया था, लेकिन वह अपने विदाई मैच में केवल 13 रन ही बना सकीं।

भारतीय गेंदबाजों ने पूरी तरह किया मैच पर कब्जा

इंग्लैंड की बल्लेबाजी पूरे मैच में भारतीय गेंदबाजों के दबाव से उबर नहीं सकी। एमी जोन्स ने 54 रन बनाकर कुछ देर संघर्ष किया, जबकि सोफी एक्लेस्टोन ने 50 रन की उपयोगी पारी खेली। इसके बावजूद इंग्लैंड की पूरी टीम 186 रन पर ऑलआउट हो गई। दूसरी पारी में अनुभवी स्पिनर स्नेह राणा ने सबसे अधिक चार विकेट लेकर जीत की राह आसान की। वहीं क्रांति गौड़, दीप्ति शर्मा और सायली सतघरे ने दो-दो विकेट हासिल कर इंग्लैंड की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।

12 साल बाद इंग्लैंड में टेस्ट जीत

इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने इंग्लैंड में 12 वर्षों बाद टेस्ट मुकाबला जीतने का गौरव हासिल किया। लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक मैदान पर मिली यह जीत भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास की सबसे यादगार उपलब्धियों में शामिल हो गई है। स्मृति मंधाना की दोनों पारियों में शानदार बल्लेबाजी, यस्तिका भाटिया का शतक, क्रांति गौड़ की घातक गेंदबाजी और स्नेह राणा के निर्णायक स्पेल ने मिलकर भारत को एक ऐसी जीत दिलाई, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। यह प्रदर्शन आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए भी भारतीय टीम का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला साबित होगा।


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