Ind Vs Sl: गाल टेस्ट में भारत की दोहरी परीक्षा, स्पिन के साथ रिवर्स स्विंग और असमान उछाल से निपटने की तैयारी
भारत ने श्रीलंका क्रिकेट एकादश के खिलाफ तीन दिवसीय अभ्यास मैच खेलकर जरूरी तैयारी की। इसके बाद नानडेस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब में वैकल्पिक अभ्यास सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में टीम के ज्यादातर खिलाड़ी पहुंचे, हालांकि मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बराड़ जैसे तेज गेंदबाज इसमें शामिल नहीं हुए।

गाले: India Sri Lanka Test series 2026: करीब नौ साल बाद श्रीलंका की धरती पर टेस्ट सीरीज खेलने जा रही भारतीय टीम के सामने सिर्फ स्पिन की चुनौती नहीं होगी। 15 अगस्त से गाले में शुरू होने वाले पहले टेस्ट में टीम इंडिया को पुरानी गेंद से होने वाली रिवर्स स्विंग और पिच के बदलते मिजाज से भी निपटना होगा। दो टेस्ट मैचों की यह सीरीज भारतीय टीम के लिए श्रीलंकाई परिस्थितियों को समझने के साथ-साथ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। WTC अंक तालिका में पांचवें स्थान पर मौजूद भारतीय टीम की कोशिश सीरीज में मजबूत शुरुआत करने की होगी। कप्तान शुभमन गिल और टीम प्रबंधन ने इसके लिए तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अभ्यास के दौरान टीम ने उन परिस्थितियों को तैयार करने पर जोर दिया, जिनका सामना गाले टेस्ट के आगे बढ़ने के साथ बल्लेबाजों को करना पड़ सकता है।
रिवर्स स्विंग की चुनौती के लिए खास तैयारी
भारत ने श्रीलंका क्रिकेट एकादश के खिलाफ तीन दिवसीय अभ्यास मैच खेलकर जरूरी तैयारी की। इसके बाद नानडेस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब में वैकल्पिक अभ्यास सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में टीम के ज्यादातर खिलाड़ी पहुंचे, हालांकि मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बराड़ जैसे तेज गेंदबाज इसमें शामिल नहीं हुए। अभ्यास सत्र में सबसे ज्यादा चर्चा कप्तान शुभमन गिल की बल्लेबाजी को लेकर रही। रिपोर्ट के मुताबिक, टीम प्रबंधन ने गाले की पिच पर गेंद पुरानी होने के बाद पैदा होने वाली रिवर्स स्विंग को ध्यान में रखते हुए गिल के लिए विशेष अभ्यास कराया। इसके लिए उसी पिच को दोबारा तैयार कराया गया, जिस पर अभ्यास मैच खेला गया था। पिच को जानबूझकर चौथे दिन की परिस्थितियों जैसा खुरदरा और दरारों वाला रखा गया, ताकि बल्लेबाजों को टेस्ट मैच के अंतिम चरण जैसी चुनौती मिल सके।
पुरानी कूकाबुरा गेंद से गिल ने किया अभ्यास
गिल ने तीन थ्रोडाउन विशेषज्ञों नुवान सेनविरत्ने, राघवेंद्र द्विवेदी और दयानंद गरानी के सामने करीब 20 मिनट तक बल्लेबाजी की। इस दौरान उन्होंने खास तौर पर अर्ध-पुरानी कूकाबुरा गेंदों का इस्तेमाल करने को कहा। इसका मकसद बल्लेबाजों को उस स्थिति के लिए तैयार करना था, जब गेंद पूरी तरह नई न हो और पुरानी होने के साथ रिवर्स स्विंग हासिल करने लगे। इसके बाद जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को भी पुरानी गेंद से गेंदबाजी करने के निर्देश दिए गए। भारतीय टीम अपने साथ अलग-अलग तरह की कूकाबुरा गेंदें लेकर श्रीलंका पहुंची है। इससे साफ है कि टीम प्रबंधन टेस्ट के दौरान गेंद के व्यवहार में होने वाले बदलाव को लेकर पहले से तैयारी कर रहा है।
गाले की पिच पर असमान उछाल भी चुनौती
गाले की पिच टेस्ट मैच के आगे बढ़ने के साथ तेजी से बदलने के लिए जानी जाती है। शुरुआती दौर में बल्लेबाजों को अपेक्षाकृत बेहतर परिस्थितियां मिल सकती हैं, लेकिन जैसे-जैसे पिच पुरानी होगी, दरारें बढ़ने लगेंगी और स्पिन को मदद मिलने की संभावना बढ़ेगी। ऐसे में गेंद कभी तेजी से घूम सकती है तो कभी पिच से कम उछाल लेकर बल्लेबाज तक पहुंच सकती है। असमान उछाल और तेज टर्न बल्लेबाजों की तकनीक और धैर्य की कड़ी परीक्षा ले सकते हैं। श्रीलंकाई परिस्थितियों में गेंद के अपेक्षाकृत जल्दी घिसने की संभावना भी रहती है। यही वजह है कि भारत सिर्फ स्पिन खेलने की तैयारी तक सीमित नहीं रहना चाहता और पुरानी गेंद के खिलाफ भी बल्लेबाजों को तैयार किया जा रहा है।
भारत के पास चार स्पिन विकल्प
भारतीय टीम के पास स्पिन विभाग में पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं। रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार और सारांश जैन के रूप में टीम के पास चार स्पिन विकल्प हैं। गाले की पिच पर स्पिन के अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है। हालांकि, भारतीय बल्लेबाजों को श्रीलंका के स्पिनरों के खिलाफ भी अपनी तकनीक मजबूत रखनी होगी। टीम के लिए पैरों का सही इस्तेमाल, गेंद की लंबाई को जल्दी पढ़ना और स्वीप शॉट का सही चयन महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
गिल और जायसवाल पर रहेंगी नजरें
अभ्यास मैच से भारतीय बल्लेबाजी को कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। देवदत्त पडिक्कल ने पहली पारी में शतक लगाया, जबकि यशस्वी जायसवाल ने दूसरी पारी में तेज अर्धशतक जमाया। कप्तान शुभमन गिल ने भी वापसी करते हुए 54 रन बनाए। हालांकि, अभ्यास मैच और टेस्ट क्रिकेट की परिस्थितियों में काफी अंतर होता है। असली चुनौती गाले में तब सामने आएगी, जब गेंद पुरानी होगी, स्पिन तेज होगा और पिच पर दरारें बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें बढ़ाएंगी।
नौ साल बाद श्रीलंका में टेस्ट सीरीज
भारत के लिए यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि टीम 2017 के बाद पहली बार श्रीलंका में टेस्ट सीरीज खेल रही है। मौजूदा भारतीय टीम के ज्यादातर खिलाड़ियों के लिए श्रीलंका की परिस्थितियां नई हैं। WTC अंक तालिका में पांचवें स्थान पर मौजूद भारत जानता है कि इस सीरीज में हासिल होने वाला हर अंक महत्वपूर्ण है। ऐसे में गाले टेस्ट में टीम की रणनीति सिर्फ स्पिन का सामना करने तक सीमित नहीं होगी। पुरानी गेंद, रिवर्स स्विंग, असमान उछाल और तेजी से बदलती पिच के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन भारत की जीत की राह तय कर सकता है।


