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डी गुकेश : 7 साल की उम्र में चली शतरंज की पहली बाजी, सबसे युवा वर्ल्ड चैंपियन बनकर रचा इतिहास

डोम्माराजू गुकेश शतरंज की दुनिया में तेजी से उभरता हुआ एक चैंपियन खिलाड़ी। गुकेश ने महज 7 साल की उम्र में शतरंज की अपनी पहली चाल चली थी। उन्होंने महज 18 साल की उम्र में विश्व चैंपियन कहलाने का तमगा हासिल किया। 5 फुट और 7 इंच के गुकेश अपनी चालों से विपक्षी खिलाड़ी को भी अपना मुरीद बना लेते हैं।

डी गुकेश : 7 साल की उम्र में चली शतरंज की पहली बाजी, सबसे युवा वर्ल्ड चैंपियन बनकर रचा इतिहास
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नई दिल्ली। डोम्माराजू गुकेश। शतरंज की दुनिया में तेजी से उभरता हुआ एक चैंपियन खिलाड़ी। गुकेश ने महज 7 साल की उम्र में शतरंज की अपनी पहली चाल चली थी। उन्होंने महज 18 साल की उम्र में विश्व चैंपियन कहलाने का तमगा हासिल किया। 5 फुट और 7 इंच के गुकेश अपनी चालों से विपक्षी खिलाड़ी को भी अपना मुरीद बना लेते हैं।

डी गुकेश का जन्म 29 मई, 2006 को चेन्नई में हुआ। गुकेश के पिता डॉ. रजनीकांत ईएनटी सर्जन हैं, जबकि उनकी मां माइकोबायोलॉजिस्ट हैं। यानी परिवार का शतरंज से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था।

हालांकि, गुकेश की बचपन से ही इस खेल के प्रति खास रुचि थी। उन्होंने 7 साल की उम्र में शतरंज की अपनी पहली बाजी चली। गुकेश का मन पढ़ाई से ज्यादा शतरंज की चालों में लगता था। हफ्ते के कम से कम तीन दिन गुकेश एक से दो घंटे प्रैक्टिस किया करते थे।

गुकेश की काबिलियत को जल्द ही उनके कोच और आसपास के लोग पहचान गए। उन्होंने बेहद कम उम्र में ही लोकल टूर्नामेंट में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। महज 9 साल की उम्र में गुकेश ने एशियन स्कूल शतरंज चैंपियनशिप के अंडर-9 टूर्नामेंट में हिस्सा लिया, और वह खिताब को अपने नाम करने में भी सफल रहे।

इसके बाद कड़ी मेहनत और जमकर प्रैक्टिस लगातार जारी रही। ठीक तीन साल बाद, 12 साल की उम्र में, गुकेश ने वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में हिस्सा लिया, और यहां भी जीत का परचम लहराया। गुकेश ने पांच गोल्ड मेडल अपने नाम किए। 12 साल 7 महीने और 17 दिन में गुकेश इस खेल के इतिहास में तीसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने।

डी गुकेश के लिए 2024 उनके करियर का अब तक का सबसे ऐतिहासिक साल साबित हुआ। महज 18 साल की उम्र में वह शतरंज के वर्ल्ड चैंपियन बने और छोटी से उम्र में देखे उस ख्वाब को साकार करने में सफल रहे। वह सबसे युवा विश्व चैंपियन बने और उन्होंने दिग्गज गैरी कास्परोव का रिकॉर्ड तोड़ा। गुकेश यह उपलब्धि हासिल करने वाले विश्वनाथन आनंद के बाद महज दूसरे भारतीय खिलाड़ी बने। गुकेश को उनकी इस उपलब्धि के लिए भारत सरकार ने भी साल 2025 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया।



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