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पत्नी के एक सवाल ने बदली सूर्यकुमार यादव की किस्मत, ‘सूर्या’ से टीम इंडिया के कप्तान बनने तक का सफर
खुद सूर्यकुमार मानते हैं कि उनकी जिंदगी और करियर का टर्निंग पॉइंट एक बेहद साधारण-सा सवाल था, जो उनकी पत्नी ने 2018 में उनसे पूछा था। यही सवाल उनके लिए प्रेरणा बना और उन्होंने टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए खुद को पूरी तरह बदल दिया।

नई दिल्ली: भारतीय टी-20 टीम के कप्तान और विश्व कप विजेता सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav)की सफलता के पीछे सिर्फ उनकी प्रतिभा ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी देविशा का अहम योगदान भी रहा है। खुद सूर्यकुमार मानते हैं कि उनकी जिंदगी और करियर का टर्निंग पॉइंट एक बेहद साधारण-सा सवाल था, जो उनकी पत्नी ने 2018 में उनसे पूछा था। यही सवाल उनके लिए प्रेरणा बना और उन्होंने टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए खुद को पूरी तरह बदल दिया।
एक सवाल जिसने बदल दी सोच
सूर्यकुमार यादव ने एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में उस खास पल को याद किया जब उनकी पत्नी देविशा ने उनसे सीधा सवाल किया-“अगर आप भारत के लिए खेलना चाहते हैं, तो आपकी क्या योजना है?” सूर्य बताते हैं कि उनकी शादी 2016 में हुई थी और उस समय वह कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के लिए खेल रहे थे। 2018 में जब वह मुंबई इंडियंस में शामिल हुए, तब देविशा ने उनके करियर और दिनचर्या को करीब से देखा।
देविशा ने उनसे कहा कि उनके साथ खेलने वाले कई खिलाड़ी अब भारतीय टीम का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में उन्होंने सूर्य से पूछा कि उनका लक्ष्य क्या है। जब सूर्य ने कहा कि वह भी भारत के लिए खेलना चाहते हैं, तो अगला सवाल आया- “कैसे?” सूर्य के मुताबिक, यह कोई लंबी बहस नहीं थी, बल्कि एक छोटी लेकिन गहरी बातचीत थी, जिसने उन्हें अपने लक्ष्य को लेकर गंभीर बना दिया।
लक्ष्य के लिए बदली पूरी लाइफस्टाइल
इस बातचीत के बाद सूर्यकुमार और देविशा ने मिलकर एक नई शुरुआत की। उन्होंने तय किया कि अगर टीम इंडिया तक पहुंचना है, तो जीवनशैली में बड़े बदलाव करने होंगे। सूर्य ने बताया कि उन्हें कई चीजों में कटौती करनी पड़ी, खान-पान से लेकर दोस्तों के साथ समय बिताने तक। वीकेंड की मस्ती, आराम और सामान्य दिनचर्या को पीछे छोड़कर उन्होंने पूरी तरह अपने खेल पर ध्यान केंद्रित किया। इस बदलाव का असर जल्दी ही दिखने लगा। 2018 के आईपीएल सीजन में सूर्यकुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 512 रन बनाए। इसके साथ ही घरेलू क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया।
2018 से 2021 तक का सुनहरा सफर
2018 के बाद सूर्यकुमार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2019 और 2020 में भी उन्होंने अपनी शानदार फॉर्म जारी रखी। वह खुद बताते हैं कि उस दौरान वह “एक अलग ही मूड” में थे और खेल का पूरा आनंद लेने लगे थे। 2020 उनका सबसे बेहतरीन साल रहा और आखिरकार 2021 में उन्हें भारतीय टीम में जगह मिल गई। यह वही लक्ष्य था, जिसके लिए उन्होंने और उनकी पत्नी ने मिलकर मेहनत की थी।
देविशा बनीं ‘पर्दे के पीछे की ताकत’
सूर्यकुमार यादव मानते हैं कि देविशा हमेशा उनके लिए एक मजबूत सहारा बनी रहीं। उन्होंने कभी भी क्रिकेट के तकनीकी पहलुओं में हस्तक्षेप नहीं किया, लेकिन जीवन से जुड़े अहम फैसलों में उनका मार्गदर्शन किया। सूर्य कहते हैं कि एक जीवनसाथी का सबसे बड़ा गुण उसकी ईमानदारी होती है। देविशा ने हमेशा उन्हें सच्चाई बताई और बेहतर बनने के लिए प्रेरित किया। उनके मुताबिक, अगर एक जोड़ा साथ आगे बढ़ना चाहता है, तो उनके बीच साफ और निश्छल बातचीत बेहद जरूरी है।
‘क्रिकेट को घर के बाहर छोड़ो’देविशा की एक और सलाह ने सूर्यकुमार के जीवन पर गहरा असर डाला। उन्होंने सूर्य से कहा कि क्रिकेट को घर के अंदर लेकर न आएं। सूर्य बताते हैं कि घर पर वह कोई सुपरस्टार नहीं, बल्कि सिर्फ “सूर्या” हैं। वहां उन्हें एक सामान्य इंसान की तरह रहना चाहिए। देविशा ने उन्हें सिखाया कि उपलब्धियों के बावजूद विनम्र और जमीन से जुड़े रहना जरूरी है। छोटी-छोटी बातें जैसे खाना खाने के बाद अपनी प्लेट खुद रखना भी जीवन में बड़ा महत्व रखती हैं।
2024 और 2026 की टीमों में फर्क
सूर्यकुमार यादव ने हाल ही में 2024 और 2026 की टी-20 विश्व कप विजेता टीमों की तुलना भी की। उनके मुताबिक, 2024 की टीम में अनुभव का जबरदस्त जोश था, जिसने लंबे समय से चले आ रहे आईसीसी ट्रॉफी के सूखे को खत्म किया। वहीं, 2026 की टीम में युवा खिलाड़ियों का उत्साह और जुनून देखने को मिला। उन्होंने कहा कि दोनों टीमों के बीच ज्यादा फर्क नहीं था, बस 19-20 का अंतर था। सूर्य के अनुसार, 2026 की टीम में अनुभव थोड़ा कम था, लेकिन ऊर्जा और जोश ज्यादा था। टीम के अधिकांश खिलाड़ी 25 से 27 साल के थे, जिन्हें बड़े मंच पर खेलने का अनुभव समझाना जरूरी था।
साझेदारी का भी परिणाम
सूर्यकुमार यादव की कहानी यह दिखाती है कि सफलता सिर्फ मैदान पर नहीं, बल्कि उसके पीछे की सोच, अनुशासन और सही मार्गदर्शन से बनती है।
एक साधारण-सा सवाल “आपकी योजना क्या है?” ने उनके करियर की दिशा बदल दी। देविशा के समर्थन, ईमानदारी और मार्गदर्शन ने उन्हें न सिर्फ एक बेहतर खिलाड़ी, बल्कि एक बेहतर इंसान भी बनाया। आज जब सूर्यकुमार यादव टीम इंडिया के कप्तान के रूप में खड़े हैं, तो यह सिर्फ उनकी मेहनत का नहीं, बल्कि उस साझेदारी का भी परिणाम है, जिसने उन्हें अपने लक्ष्य तक पहुंचाया।
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