सार्वजनिक कंपनियों को संकट में डाल रही सरकार : सोनिया
सोनिया गाँधी ने लोकसभा में आज रायबरेली की रेल कोच फैक्ट्री के कंपनीकरण का मुद्दा उठाते हुये सरकार पर चुनिंदा पूँजीपतियों को लाभ पहुँचाने के लिए सरकारी कंपनियों को संकट में डालने का आरोप लगाया

नई दिल्ली। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने लोकसभा में आज रायबरेली की रेल कोच फैक्ट्री के कंपनीकरण का मुद्दा उठाते हुये सरकार पर चुनिंदा पूँजीपतियों को लाभ पहुँचाने के लिए सरकारी कंपनियों को संकट में डालने का आरोप लगाया।
उत्तर प्रदेश की रायबरेली संसदीय सीट से लोकसभा सदस्य श्रीमती गाँधी ने बजट से महज तीन दिन पहले रेल बजट को आम बजट से अलग करने को लेकर भी मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा “संसद में अलग से रेल बजट पेश करने की इतनी पुरानी पंरपरा रही है। उस प्रथा को पता नहीं इस सरकार ने क्यों अचानक समाप्त कर दिया?”
संप्रग अध्यक्ष ने शून्यकाल में रेलवे की कंपनियों के निजीकरण का मुद्दा उठाते हुये कहा कि सरकार ने रेलवे की छह उत्पादक इकाइयों का कंपनीकरण करने का फैसला किया है। इसमें रायबरेली की मॉडर्न रेल कोच फैक्ट्री भी शामिल है। उन्होंने कहा, “कंपनीकरण दरअसल निजीकरण की शुरुआत है जो देश की अमूल्य संपत्ति कौड़ियों के भाव चंदी निजी हाथों के हवाले करने की पहली प्रक्रिया है। इससे हजारों-हजारों लोग बेरोजगार हो जाते हैं।”
उन्होंने कहा कि रायबरेली की रेल कोच फैक्ट्री कई कामयाब परियोजनाओं में से एक है। इसे तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने देश का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए शुरू किया था। यह भारतीय रेल का सबसे आधुनिक कारखाना है जहाँ सबसे सस्ते और अच्छे कोच बनते हैं। वहाँ क्षमता से ज्यादा उत्पादन हो रहा है। कंपनीकरण से दो हजार से ज्यादा मजदूरों, कर्मचारियों और उनके परिवारों का भविष्य संकट में है।
श्रीमती गाँधी ने कहा कि यह समझना मुश्किल है कि सरकार क्यों ऐसी औद्योगिक इकाई का कंपनीकरण करना चाहती है। इसकी संसदीय छान-बीन की माँग करते हुये उन्होंने कहा कि यह फैसला करने से पहले मंजदूर संघ तथा मजदूरों को भी विश्वास में नहीं लिया गया।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को उद्देश्य लोक कल्याण है, निजी क्षेत्र को लाभ पहुँचाना नहीं। उन्होंने कहा “(देश के पहले प्रधानमंत्री) पंडित जवाहर लाल नेहरू ने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को आधुनिक भारत का मंदिर कहा था। आज यह देखकर दु:ख और अफसोस होता है कि इस तरह के ज्यादातर मंदिर खतरे में हैं। मुनाफे के बावजूद उनके कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है और कुछ खास पूँजीपतियों को फायदा पहुँचाने के लिए उन्हें सांसत में डाल दया गया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, बीएसएनएल और एमटीएनएल के साथ क्या हुआ यह किसी से छिपा नहीं है।”


