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गणपित पूजा के साथ सामाजिक सरोकार

ब्रिटिश राज में स्वतंत्रता की अलख जगाने के लिए लोकमान्य तिलक द्वारा पुणे से शुरू किए गए गणपति पूजन को 1892 में मुंबई में साहेब लक्ष्मण जावले द्वारा सार्वजनिक मंडप में गणपति स्थापना में तब्दील कर दिया

गणपित पूजा के साथ सामाजिक सरोकार
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आजाद देश में भी 'राजा’, 'महाराजाके संदेश

नई दिल्ली। ब्रिटिश राज में स्वतंत्रता की अलख जगाने के लिए स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य गंगाधर तिलक द्वारा पुणे से शुरू किए गए गणपति पूजन को 1892 में मुंबई में भाऊ साहेब लक्ष्मण जावले द्वारा सार्वजनिक मंडप में गणपति स्थापना में तब्दील कर दिया।

देश में स्वतंत्रता आंदोलन को भक्ति, सामाजिक भागदारी के साथ बढ़ाने वाला यह पर्व मुंबई से दिल्ली, एनसीआर पहुंचकर एक बार फिर सामाजिक सरोकारों को समर्पित दिखाई दे रहा है। मंडप सजे हुए हैं भजन, कीर्तन, मूर्ति पूजन के अलावा पर्यावरण रक्षा, सामाजिक संदेश क्रांति का अहसास करवाते हैं।

दिल्ली के महाराजा, लक्ष्मी नगर में 16वें वर्ष में गणेश सेवा मण्डल द्वारा स्थापित किए गए हैं। भजनों के लिए यहां रोजाना फिल्मी पाश्र्व गायकों की टोलियां हाजिरी भर रही हैं तो वहीं सामाजिक सरोकारों में रक्तदान शिविर में भी रोजाना दर्जनों लोग रक्त दे रहे हैं।

मंडल प्रमुख महेंद्र लड्ढा का तर्क है-'इस मौसम में डेंगू फैलता है और जिस श्रद्धालु के परिजन को रक्त की आवश्यकता हो उसे खरीदना न पड़े इसे ध्यान में रखते हुए यह प्रयास शुरू किया गया है।’

पर्यावरण रक्षा के लिए मंडल पूर्वी दिल्ली के सभी गणपति आयोजकों को यमुना में मूर्ति विसर्जित न कर बैंक एंकलेव मैदान में कृत्रिम तालाब में करने का आमंत्रण दे रहे हैं।

मंडल पदाधिकारी सचिन गुप्ता मानते हैं कि ऐसे विसर्जन के लिए अन्य आयोजक पहले असहमत थे लेकिन पर्यावरण हित में इस पहल पर अब सहमति जरूर बन गई है।

सामाजिक संदेश की यह पहल इस वर्ष दिल्ली के महाराष्ट्र सदन से एनसीआर के दर्जनों मंडप में दिखाई देती है। महाराष्ट्र सदन, दिल्ली हाट में सरकारी आयोजन में पर्यावरण रक्षा सर्वोपरि है तो मालवीय नगर में गणेश महोत्सव मंच में आने वाले श्रद्घालुओं को वृक्ष, महिला, पर्यावरण रक्षा व जिम्मेदार ड्राइविंग का संकल्प दिया जा रहा है।

मंच के अध्यक्ष विवेक शर्मा व पंकज कुमार कहते हैं-'औपचारिकता ही सही लेकिन कम से कम संकल्प से एक संदेश तो जाता है और यह संदेश विशेषकर युवाओं व बच्चों में यदि जाता है तो वे समाज को बदलने की दिशा में सहायक होंगे यह उम्मीद कर सकते हैं।’

बीते 20वर्षों से आयोजित 'दिल्ली के राजा’भी पर्यावरण बचाओ पेड़ लगाओ, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश दे रहे हैं।

आयोजन समिति महामंत्री राजन चड्ढा से पूछा कि यह राजनीतिक संदेश नहीं है? उनका जवाब है कि धरती का श्रृंगार वृक्ष लगायें और बेटियों की रक्षा करें यह किसी भी सरकार, राजनीतिक दल का संदेश नहीं हो सकता। हम बेटों को संस्कार की बात करते हैं ताकि बेटियों को सुरक्षा मिले।

नेताजी सुभाष प्लेस में आयोजित हो रहे 'लाल बाग का राजा’महोत्सव मुंबई के फिल्मी कलाकारों के जत्थे और श्रीमदभागवत कथा से धार्मिक के साथ साथ सामाजिक संदेश पहुंचाने का दावा करता है। इस श्रृंखला में शंकर साहनी, कविता पौडवाल के कार्यक्रमों का हवाला देते हैं।


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