ललित सुरजन की कलम से स्नोडन : अपराधी नहीं, विश्व नागरिक
'यह सबको पता है कि पिछले पच्चीस साल से भारत लगातार अमेरिकापरस्ती कर रहा है

'यह सबको पता है कि पिछले पच्चीस साल से भारत लगातार अमेरिकापरस्ती कर रहा है। आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक, लगभग हर मोर्चे पर भारत की राजसत्ता अमेरिका की समर्थक और ताबेदार बन गई है। पी.वी. नरसिंह राव, अटलबिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह- प्रधानमंत्री कोई भी हो, अमेरिका का अनुसरण करने में ही सबको अपनी भलाई नज़र आती है।
आज भले ही इंदिरा गांधी की पार्टी देश पर राज कर रही हो, लेकिन इंदिराजी की स्वतंत्र विदेश नीति को हमने पूरी तरह तिलांजलि दे दी है। इसीलिए भारत के विदेश मंत्री को इस कड़वी सच्चाई से भी कोई तकलीफ नहीं हुई कि अमेरिका प्रमुख रूप से जिन पैंतीस देशों की साइबर जासूसी कर रहा है, उसमें भारत का स्थान पांचवें नंबर पर है। खुर्शीदजी ने इस बात को बहुत हल्के में टाल दिया कि अमेरिका छानबीन कर रहा है, जासूसी नहीं। ऐसा कह कर वे अपने आपको समझा सकते हैं, लेकिन जनता को नहीं।'
(देशबन्धु में 4 जुलाई 2013 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2013/07/blog-post_3.html


