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चुनावी तोहफ़ों का साइड इफेक्ट, कर्ज में डूबता मध्यप्रदेश, 2000 करोड़ और जुड़े
मध्यप्रदेश के ऊपर अभी तक तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो गया है। वित्त विभाग के अनुसार, अप्रैल 2022 की स्थिति में सरकार के ऊपर 2 लाख 95 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था। इसके बाद जून 2022 से नवंबर 2022 तक 12 हजार करोड़ रुपये कर्ज लिया गया

गजेन्द्र इंगले
भोपाल: पहले से ही कर्ज में डूबा मध्यप्रदेश अब और कर्ज के गर्त में जा रहा है। शिवराज सरकार 2000 करोड़ रुपये का कर्ज लेने का फैंसला लिया है। इस संबंध में वित्त विभाग ने राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित की है। भाजपा सरकार के एक बार फिर कर्ज ले रही है तो इसको लेकर कांग्रेस हमलावर हो गई है। विपक्ष ने इसे बीजेपी और सरकार का कमीशन का इंतजाम बताया है। वहीं सरकार के बचाव करते हुए भाजपा के मंत्री विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगा रहे हैं। मतलब साफ है चुनावी समर चल रहा है और प्रदेश कर्ज की आग में जल रहा है।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के ऊपर अभी तक तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो गया है। वित्त विभाग के अनुसार, अप्रैल 2022 की स्थिति में सरकार के ऊपर 2 लाख 95 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था। इसके बाद जून 2022 से नवंबर 2022 तक 12 हजार करोड़ रुपये कर्ज लिया गया। अब इसमें 2000 करोड़ रुपये और जुड़ गए हैं। कर्ज के संबंध में वित्त विभाग ने राजपत्र में जो अधिसूचना प्रकाशित की है उसके अनुसार सरकार भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से कर्ज लेगी। इससे विकास परियोजनाओं और आर्थिक विकास को गति देने की बात कही गई है। ये कर्ज 15 सालों के लिए लिया जाएगा. सरकार 31 जनवरी को लेगी और इसे साल 2038 तक RBI को चुकाना होगा।
कर्ज में डूबते मध्यप्रदेश पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। भाजपा इसे विकास के लिए ज़रूरी बता रही है तो कांग्रेस इसे कमीशन की तैयारी बता रही है। कांग्रेस प्रवक्ता के के मिश्रा का कहना है कि मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी सरकार प्रदेश को बेचकर जा रही है जिससे आठ महीने बाद दूसरी सरकार को भुगतना पड़े। सारा पैसा अधिकारी और नेता खाएंगे और फिर चुनाव में खरीदफरोख्त के लिए उपयोग किया जाएगा। शिवराज सरकार के ओमप्रकाश सकलेचा ने कहा कि विपक्ष गुमराह करने के लिए बयान दे रहा है. जबकि, विकास और योजनाओं के संचालन के लिए कर्ज जरूरी है। कोई पहली बार कर्ज नहीं लिया जा रहा है. इससे पहले कांग्रेस सरकार थी तब भी कर लिया गया है।
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