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गांवों में विकास की नई इबारत लिख रहा श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन

श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन की चौथी वर्षगांठ पर सोमवार को आयोजित एक कार्यक्रम में देशभर में गावों का समूह बनाकर इस मिशन के तहत किए जा रहे विकास कार्यो की तस्वीर पेश की गई

गांवों में विकास की नई इबारत लिख रहा श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन
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नई दिल्ली। श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन की चौथी वर्षगांठ पर सोमवार को आयोजित एक कार्यक्रम में देशभर में गावों का समूह बनाकर इस मिशन के तहत किए जा रहे विकास कार्यो की तस्वीर पेश की गई, जिस पर केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर प्रसन्नता जाहिर की। विकास की इस नई इबारत की तस्वीर पेश करते हुए अधिकारियों ने बताया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन के तहत ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा देशभर में 300 कलस्टर आवंटित किए गए हैं जहां बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, शौचालय, बाजार समेत तमाम मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ रोजगार के अवसर पैदा होने से गांवों से पलायन रुका है। मंत्रालय के सचिव ने गांवों के विकास के क्षेत्र में कामयाबी की कुछ कहानियों को जिक्र करते हुए कहा कि इन कलस्टरों के माध्यम से विकास की नई कहानी लिखी जा रही है।

केंद्रीय मंत्री तोमर ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन से जुड़े लोगों से सरकार द्वारा घोषित इन 300 के अतिरिक्त 1,000 कलस्टर बनाने में सहयोग करने की अपील की।

उन्होंने मिशन से जुड़े लोगों से कहा, "सरकार इन 300 के अतिरिक्त 1,000 नये कलस्टरों का काम प्रारंभ करने जारी रही है जिसमें आपके योगदान मददगार साबित होगा।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 फरवरी 2016 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन का शुभारंभ किया था जिसका मकसद गांव का विकास शहरों की तर्ज पर करना है।

इसलिए इस मिशन का आदर्श वाक्य 'आत्मा गांव की, सुविधा शहर की' रखा गया है। मिशन के चार साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तोमर ने कहा कि लोगों से 'सबका साथ सबका विकास' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सामुदायिक व समर्पित भाव से गांवों का विकास करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि जब सामुदायिक भावना बढ़ेगी और इस दिशा में कोशिशें होंगी तो केंद्र और राज्यों की सरकारें कलस्टरों के विकास के लिए साथ मिलकर काम करेंगी और केंद्रीय व राज्यों की योजनाओं का उपयोग इस दिशा में किया जाएगा।

इस मौके पर ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव ने बताया कि मंत्रालय द्वारा 300 कलस्टर आवंटित किए गए हैं जिनमें से अब तक 296 को मंजूरी मिली है और इनमें से 240 का डीपीआर तैयार कर लिया गया है।


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