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पुलिस का खौफ अपराधियों में नजर आए : मुख्यमंत्री

रायपुर ! मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह ने कहा है कि जिलों में पुलिस की वर्दी का रौब और खौफ अपराधियों में होना चाहिए।

पुलिस का खौफ अपराधियों में नजर आए : मुख्यमंत्री
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मानवाधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
प्रदेश से खत्म होना चाहिए सट्टा व जुआ
निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का अधिकारी करें सम्मान

रायपुर ! मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह ने कहा है कि जिलों में पुलिस की वर्दी का रौब और खौफ अपराधियों में होना चाहिए। जिलों मेें होने वाली घटनाओं से ही प्रशासन की छवि बनती है। पुलिस के रौब से जुआ व सट्टा खत्म होना चाहिए। नक्सली समस्यों को लेकर उन्होंने कहा नक्सल मोर्च पर पुलिस बेहतर काम रह रही है इसे और बेहतर करने की आवश्यकता है। बस्तर क्षेत्र में यदि कोई मानवधिकारों ेका हनन करेगा उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नक्सल क्षेत्रों में मानव अधिकारों की रक्षा करते हुए पुलिस को अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहिए। श्रीसिंह ने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ दुव्र्यवहार की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए। अधिकारियों कों निर्देश दिया कि उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। बढ़ते सायबर अपराधों पर अकुंश लगाने का निर्देशी भी दिया मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित कलेक्टर एस कांफ्रेस मुख्यमंत्री संबंधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिलों में बेहतर प्रशासन के लिए कलेक्टर और एस.पी. दोनों में समन्वय आवश्यक है। ं सभी कलेक्टरों को जनसमस्या निवारण शिविरों का आयोजन नियमित रूप से करने के निर्देश दिए। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से कहा कि समाज में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। पुलिस की भूमिका ऐसी होनी चाहिए, जिसमें पीडि़तों के प्रति उसकी संवेदना झलके और अपराधियों में पुलिस वर्दी का खौफ दिखे। जिलों में जुआ, सटटा, शराब के अवैध कारोबार, नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री और तस्करी आदि आपराधिक गतिविधियों को पनपने से रोकने के लिए पुलिस को अधिक से अधिक सतर्कता बरतनी होगी और अधिक चौकस रहना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तमाम चुनौतियों के बीच पुलिस अधिकारी और कर्मचारी बड़ी बहादुरी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में मानव अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी। कोई भी व्यक्ति चाहे वह पुलिस ही क्यो न हो, अगर नियम-कानूनों को तोड़ेगा तो सरकार उसे बर्दाश्त नहीं करेगी। डॉ. सिंह ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को जन-प्रतिनिधियों के साथ अच्छा व्यवहार करने की भी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि चाहे सरपंच हो या विधायक या सांसद सभी जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों का व्यवहार सम्मानजनक होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने बढ़ते शहरीकरण और आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के इस दौर में सायबर अपराधों की रोकथाम की एक बड़ी चुनौती हमारे सामने है। सिंह ने सायबर अपराधों पर अकुंश लगाने के लिए आधुनिक संचार प्रणालियों का बेहतर इस्तेमाल किए जाने पर बल दिया। संयुक्त बैठक में विभिन्न जिलों के कलेक्टरों ने आज भी प्रस्तुतिकरण दिया। सरगुजा, जशपुर, गरियाबंद और मुंगेली जिले के कलेक्टरों ने प्रस्तुतिकरण में स्वच्छ भारत मिशन के तहत अपने-अपने जिलों में संचालित गतिविधियों की जानकारी दी। रायपुर कलेक्टर ने राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए और कलेक्टर कांकेर ने जिले में कुपोषण मुक्ति के लिए उठाए जा रहे कदमों का ब्यौरा दिया। महासमुंद कलेक्टर ने जिले में चलाए जा रहे समाधान शिविरों के बारे में और रायगढ़ कलेक्टर ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत हो रहे कार्यों के बारे में अपना प्रस्तुतिकरण दिया। कलेक्टर बीजापुर ने े प्रस्तुतिकरण में अस्पताल सुधार के लिए प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

रेल्वे क्षेत्रों की झुग्गी-बस्तियों
में मिलेगा गैस कनेक्शन

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के पांच जिलों के रेल्वे क्षेत्रों में स्थित झुग्गी बस्तियों में रहने वाले गरीब परिवारों को भी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत नि:शुल्क रसोई गैस कनेक्शन देने का निर्णय लिया है। इससे इन इलाकों में कोयले और लकड़ी के धुंए से होने वाले वायु प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। ंरायपुर, कोरबा, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव के जिला कलेक्टरों को इसके लिए आवश्यक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। ं बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए किए जा रहे उपायों की भी समीक्षा की। आवास एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव अमन कुमार सिंह ने इस सिलसिले में बैठक में प्रस्तुतिकरण दिया। सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने जिलों में पर्यावरण नियमों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। डॉ. सिंह ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण की शिकायतों पर उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए।


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