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नीतीश व शिवराज के जल अभियानों में बड़ा अंतर: राजेंद्र

पटना ! पानी का नोबेल पुरस्कार माने जाने वाले ‘स्टॉकहोम वाटर प्राइज’ से सम्मानित और ‘जलपुरुष’ नाम से विख्यात राजेंद्र सिंह का मानना है कि इस समय देश में नदियों के बचाने के लिए दो अभियान चल रहे हैं,

नीतीश व शिवराज के जल अभियानों में बड़ा अंतर: राजेंद्र
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पटना ! पानी का नोबेल पुरस्कार माने जाने वाले ‘स्टॉकहोम वाटर प्राइज’ से सम्मानित और ‘जलपुरुष’ नाम से विख्यात राजेंद्र सिंह का मानना है कि इस समय देश में नदियों के बचाने के लिए दो अभियान चल रहे हैं, एक मध्यप्रदेश में और दूसरा बिहार में। मगर दोनों अभियानों में बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का अभियान जहां ‘चुनावी’ लगता है, वहीं नीतीश का अभियान ‘हकीकत’ के करीब नजर आता है।
राजेंद्र सिंह ने कहा कि नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए चल रही शिवराज की ‘नर्मदा पदयात्रा’ जहां ‘चुनावी यात्रा’ लगती है, वहीं नीतीश का बिहार को बाढ़ से बचाने का अभियान हकीकत के करीब नजर आ रहा है। गंगा की अविरलता को लेकर पटना में आयोजित सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे सिंह ने विशेष बातचीत में कहा कि नीतीश गंगा के सवाल पर बहस के लिए न केवल देश के नामी-गिरामी पर्यावरणविदों को बुलाया है, बल्कि विदेशों के भी जानकारों को बुलाया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार सरकार बीमारी होने के कारणों को जानने और उसका उपाय ढूंढऩे की कोशिश कर रही है, जबकि मध्यप्रदेश सरकार बिना बीमारी जाने दवा देने की बात कर रही है। सिंह ने पश्चिम बंगाल स्थित फरक्का बांध के विषय में चर्चा करते हुए कहा कि फरक्का बांध बिहार में बाढ़ को अधिक समय तक टिके रहने का मुख्य कारण है। ‘जलपुरुष’ ने कहा कि फरक्का बांध के कारण गंगा में सिल्ट जमा हुआ है, जिस कारण गंगा ऊपर उठ गई है। ऐसे में बाढ़ आने के बाद ‘बैक वाटर’ पीछे आने लगा और पानी अन्य क्षेत्रों में भी फैल जाता है। ऐसे में पानी को निकलने में समय लगता है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि फरक्का बांध के पहले भी बिहार में बाढ़ आती थी, परंतु पानी जल्दी निकल जाता था। मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सिंह का मानना है कि बिहार में गंगा के सवाल बाढ़ और सुखाड़ हैं। इस समस्या के निदान भी यहां खोजे जा रहे हैं। राजेंद्र सिंह का साफ कहना है कि गंगा नदी की निर्मलता और अविरलता के लिए केंद्र सरकार की ओर से जो ‘नमामि गंगे’ अभियान छेड़ा गया है।

वह सिर्फ ठेकेदारों को लाभ देने के लिए है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत हुआ कोई काम अब तक नहीं दिखाई दे रहा है। जलपुरुष ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "देश की तमाम नदियों को बचाने के लिए हम सभी को संघर्ष करना होगा। इसके लिए न कोई सरकार काम कर रही है, न 80 फीसदी जनता।" 'बिहार की शोक' कही जाने वाली कोसी नदी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि नदियां जो भी उथली होंगी, उनके पेट में सिल्ट जमा होगा, वहां बाढ़ आएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि नदियों को अविरल बनाने की जरूरत है।


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