ईरान परमाणु समझौता वार्ता को लेकर गंभीर मतभेद बरकरार
अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि छह दौर की वार्ता के बाद 2015 के ईरानी परमाणु समझौते को बहाल करने में वाशिंगटन और तेहरान के बीच अभी भी गंभीर मतभेद हैं

वॉशिंगटन। अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि छह दौर की वार्ता के बाद 2015 के ईरानी परमाणु समझौते को बहाल करने में वाशिंगटन और तेहरान के बीच अभी भी गंभीर मतभेद हैं। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन और तेहरान के बीच अप्रैल से ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में छह दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता हो चुकी है, जिसका उद्देश्य परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करना है, जिसे औपचारिक रूप से संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) के रूप में जाना जाता है।
अधिकारी ने गुरुवार को एक ब्रीफिंग कॉल में संवाददाताओं से कहा, "हमारे बीच अभी भी गंभीर मतभेद हैं जिन्हें दूर नहीं किया गया है, कई मुद्दों पर ईरान के साथ गंभीर मतभेद हैं, चाहे वह परमाणु क्षेत्र में उठाए जाने वाला कदम हो, जिसमें ईरान को पहल करने की आवश्यकता है, या फिर अमेरिका की तरफ से प्रतिबंधों से राहत दिए जाने की बात हो या दोनों पक्षों द्वारा उठाए जाने वाले कदमों का क्रम हो।"
नाम न जाहिर करने की शर्त पर अधिकारी ने आगे कहा, कुछ भी नहीं होगा, जब तक आपस में सहमति नहीं बन जाती है।
अधिकारी ने यह कहते हुए कि आने वाले समय में अमेरिकी टीम सातवें दौर की वार्ता में भाग ले सकती है, सुझाया कि शायद दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हो सकता है।
बता दें कि अमेरिकी सरकार मई, 2018 में जेसीपीओए से हट गई और ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगा दिया। इस पर जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने मई, 2019 से अपनी जेसीपीओए प्रतिबद्धताओं के कुछ हिस्सों को धीरे-धीरे निलंबित कर दिया।


