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एसईसीएल के खिलाफ 41 गांवों के भू-विस्थापित लामबंद

कोरबा ! एसईसीएल की गेवरा, कुसमुंडा, दीपका एवं कोरबा क्षेत्र परियोजना से प्रभावित 41 गांव के भूविस्थापितों ने एक बार फिर प्रबंधन के खिलाफ कमर कस ली है।

एसईसीएल के खिलाफ 41 गांवों के भू-विस्थापित लामबंद
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जनाक्रोश रैली, भजन-कीर्तन भूख हड़ताल कर दर्ज
कराएंगे विरोध

कोरबा ! एसईसीएल की गेवरा, कुसमुंडा, दीपका एवं कोरबा क्षेत्र परियोजना से प्रभावित 41 गांव के भूविस्थापितों ने एक बार फिर प्रबंधन के खिलाफ कमर कस ली है। चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान करने के साथ ही पुलिस और प्रशासन भी अलर्ट हो गया है व पल-पल की खबर जुटाई जा रही है। माना जा रहा है कि 2 मई को हुए साइलो घेराव के बाद यह काफी असरकारक आंदोलन होगा।
जिला स्तरीय ऊर्जाधानी भू-विस्थापित कल्याण समिति के भठोरा स्थित कार्यालय में भूविस्थापितों ने बैठक कर रोजगार, मुआवजा व पुनर्वास को लेकर संयुक्त मांग पत्र पर मंथन किया और मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैया की है। आंदोलन का पहला चरण 6 फरवरी को जनाक्रोश रैली के रूप में सर्वमंगला मंदिर से कलेक्टर कार्यालय तक पैदल यात्रा कर ज्ञापन सौंपा जाएगा। यह जनआक्रोश रैली एसईसीएल प्रबंधन, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के खिलाफ होगी। दूसरे चरण में 6 मार्च को 41 गांव के भू-विस्थापितों द्वारा सांसद निवास के सामने एक दिवसीय सामूहिक भजन-कीर्तन करेंगे। तीसरे चरण में 16 मार्च को एसईसीएल मुख्यालय के समक्ष भूख हड़ताल, चौथे चरण में 6 अप्रैल को दिल्ली के कोयला मंत्रालय के समक्ष भू-विस्थापितों द्वारा भूख हड़ताल, पांचवां चरण 2 मई को भू-विस्थापितों द्वारा मेगा ब्लाक कर गेवरा, दीपका व कुसमुंडा के साइलो से कोल परिवहन व उत्पादन बाधित किया जाएगा। छठवें व अंतिम चरण में 41 गांव के बेरोजगारों द्वारा रोजगार के लिए सामूहिक रूप से पलायन किया जाएगा। बैठक में ऊर्जाधानी भू-विस्थापित कल्याण समिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र प्रसाद राठौर, उपाध्यक्ष बृजेश श्रीवास, सचिव दीपक कुमार साहू व रूद्रदास महंत सहित विभिन्न ग्रामों के ग्रामीण काफी संख्या में उपस्थित थे। दूसरी ओर भूविस्थापितों के एक बार फिर लामबंद होने की खबर जैसे ही आम हुई, जिला से लेकर राजधानी तक खलबली मच गई है। सूत्रों की मानें तो इस आंदोलन के लिए बनाई जा रही रणनीति और पल-पल की खबर लेने की कवायद पुलिस और प्रशासन ने भी शुरू कर दी है। भूविस्थापितों के गांवों में अधिकारियों का फेरा भी बढ़ता देखा जा रहा है। देखना होगा कि आंदोलन शुरू होने से पहले मांगों का निराकरण करा लिया जाता है या फिर आंदोलन होकर रहेगा।
एक माह में हल का आश्वासन सात माह बीत गए
ऊर्जाधानी भू विस्थापित कल्याण समिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र प्रसाद राठौर ने बताया कि पिछले वर्ष 2 मई 2016 को भूविस्थापितों द्वारा गेवरा खदान के साइलो क्षेत्र में आंदोलन किया गया था। आंदोलन के बाद कलेक्टर की अध्यक्षता में सांसद, कटघोरा विधायक, एसईसीएल प्रबंधन व भूविस्थापितों के मध्य 15 मई को कलेक्ट्रेट में जिला पुर्नवास समिति की बैठक हुई थी। कुछ मांगों को पूरा कराने के लिए आश्वासन दिया गया व एक माह के अंदर भूविस्थापितों की समस्या हल होने की बात कही गई थी, किन्तु सात माह बीत जाने के बाद भी मांगों को पूरा नहीं कराया जा सका है।
विधायक की अगुवाई में हुआ था घेराव
याद रहे 2 मई 2016 को गेवरा खदान के साइलो का घेराव के आंदोलन को कोरबा विधायक जयसिंह अग्रवाल ने भी अपना नेतृत्व प्रदान किया और इनकी अगुवाई में अब तक का विशाल आंदोलन भूविस्थापितों ने बताया। घेराव के दौरान हजारों लोगों ने अपनी गिरफ्तारी भी दी थी। ग्राम भठोरा, नरईबोध, रलिया, पोड़ी, अमगांव, बाम्हनपाठ, भिलाई बाजार, सलोरा, पंडरीपानी, बरभांठा, सुआभोड़ी, मलगांव, चैनपुर, झींगटपुर, बरेली, रेंकी, दीपका, हरदीबाजार, जुनाडीह, खुसरूडीह, बतारी, कोसमंदा, मनगांव, घाटामुड़ा, विजयनगर, नेहरूनगर, ढुरैना, पाली, पड़निया, खोडरी, चुुरैल, दुल्लापुर, बरमपुर, दुरपा, बरपाली, गेवरा बस्ती, धरमपुर, जटराज व सोनपुरी के भूविस्थापित एक बार फिर अपने अधिकार के लिए एकजुट हुए हैं।


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