वेब टेलीस्कोप ने कैद किया इंटरस्टेलर कॉमेट 3आई-एटलस का केमिकल फिंगरप्रिंट
यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) ने एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज की जानकारी साझा करते हुए बताया है कि जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने पहली बार किसी इंटरस्टेलर यानी दूसरे स्टार सिस्टम से आए खगोलीय पिंड का विस्तृत केमिकल फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड किया है।

नई दिल्ली। यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) ने एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज की जानकारी साझा करते हुए बताया है कि जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने पहली बार किसी इंटरस्टेलर यानी दूसरे स्टार सिस्टम से आए खगोलीय पिंड का विस्तृत केमिकल फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड किया है।
यह अध्ययन कॉमेट 3आई-एटलस (धूमकेतु) पर किया गया, जो सूर्य की परिक्रमा करने के बाद अब हमारे सौरमंडल से बाहर निकल रहा है। यह धूमकेतु सूरज के करीब आने के बाद सौर मंडल से बाहर निकल रहा था, तभी वेब टेलीस्कोप ने इसके चारों ओर मौजूद गैसों का विस्तृत विश्लेषण किया। इससे पता चला कि यह धूमकेतु हमारे सौर मंडल के सामान्य धूमकेतुओं से काफी अलग है।
वेब टेलीस्कोप के अनुसार, धूमकेतु के कोमा (गैसीय आवरण) में पानी की भाप दूर-दूर तक फैली हुई थी। यह बर्फीले कणों से निकल रही थी जो नाभिक (न्यूक्लियस) से काफी दूर थे। वहीं, कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन मुख्य रूप से कोर के करीब पाए गए। सबसे खास बात यह रही कि मीथेन की मौजूदगी पहली बार किसी इंटरस्टेलर धूमकेतु में दर्ज की गई है।
वैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की हुई कि पानी की तुलना में मीथेन की मात्रा काफी अधिक पाई गई। यह स्तर सौर मंडल के धूमकेतुओं में बहुत कम देखा जाता है। इसके अलावा, कार्बन डाइऑक्साइड और पानी का अनुपात भी असामान्य रूप से ज्यादा था।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये संकेत बताते हैं कि धूमकेतु 3आई एटलस हमारे सूर्य जैसी किसी और जगह, बहुत अलग परिस्थितियों में बना था। अनुमान है कि यह किसी दूसरे तारे के चारों ओर जहां तापमान और रासायनिक वातावरण पूरी तरह भिन्न था, वहां पर बना हो।
वेब टेलीस्कोप ने इस धूमकेतु को दो बार ऑब्जर्व किया। पहली बार दिसंबर 2025 के मध्य में जब यह सूरज से लगभग 330 मिलियन किलोमीटर दूर था। दूसरी बार 27 दिसंबर 2025 को, जब यह और दूर चला गया था और दूरी बढ़कर 380 मिलियन किलोमीटर हो गई थी। दोनों अवसरों पर मिले डेटा से वैज्ञानिकों को इसकी उत्पत्ति और संरचना का बेहतर अंदाजा लगा।
ईएसए ने कहा कि हो सकता है कि हम इस धूमकेतु को फिर कभी न देख सकें, क्योंकि यह अब हमारे सौर मंडल से बहुत दूर जा चुका है। लेकिन इसने हमें एक खास जानकारी दी है। यह खोज भविष्य में अन्य इंटरस्टेलर वस्तुओं का अध्ययन करने में मदद मिलेगी और यह समझने में कि ब्रह्मांड के अलग-अलग हिस्सों में रसायन कैसे बने।


