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हरा से पीला तक, अलग-अलग क्यों होता है 'ओशन कलर', वैज्ञानिकों की ये राय

अक्सर यह देखा गया है कि समुद्र का जल केवल नीला या हरा ही नहीं, बल्कि कई बार पीला, लाल या अन्य रंगों में भी दिखाई देता है। महासागरों के रंग में यह भिन्नता सूर्य के प्रकाश और जल में मौजूद सूक्ष्म जीवों, वनस्पतियों, शैवाल (एल्गी), खनिज कणों और घुले हुए कार्बनिक पदार्थों की आपसी प्रतिक्रिया का परिणाम होती है।

हरा से पीला तक, अलग-अलग क्यों होता है ओशन कलर, वैज्ञानिकों की ये राय
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नई दिल्ली। अक्सर यह देखा गया है कि समुद्र का जल केवल नीला या हरा ही नहीं, बल्कि कई बार पीला, लाल या अन्य रंगों में भी दिखाई देता है। महासागरों के रंग में यह भिन्नता सूर्य के प्रकाश और जल में मौजूद सूक्ष्म जीवों, वनस्पतियों, शैवाल (एल्गी), खनिज कणों और घुले हुए कार्बनिक पदार्थों की आपसी प्रतिक्रिया का परिणाम होती है।

ये तत्व प्रकाश की विभिन्न तरंगदैर्ध्य (वेवलेंथ) को अलग-अलग प्रकार से अवशोषित और परावर्तित करते हैं, जिससे पानी का रंग परिवर्तित हो जाता है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार, ओशन कलर' वास्तव में जल की सतह से परावर्तित होने वाली रोशनी का एक स्पेक्ट्रल कंपोजिशन है। शुद्ध जल प्रकाश को अधिक अवशोषित करता है, जिससे वह नीला दिखाई देता है। इसके विपरीत, जिन क्षेत्रों में फाइटोप्लांकटन (सूक्ष्म समुद्री पौधे और शैवाल) की अधिकता होती है, वहां क्लोरोफिल की उपस्थिति के कारण जल हरा नजर आता है। अधिक जैविक सक्रियता वाले उत्पादक क्षेत्र अक्सर हरे दिखाई देते हैं, जबकि कम सक्रियता वाले क्षेत्र नीले। समुद्र का यह बदलता रंग समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य, फाइटोप्लांकटन की सघनता और जैविक गतिविधियों के महत्वपूर्ण संकेत देता है।

वैज्ञानिक इन रंगों का अध्ययन करके समुद्रों, झीलों और तटीय इलाकों में क्या हो रहा है, यह समझते हैं। इससे हानिकारक एल्गल ब्लूम का पता लगाना, मॉनिटरिंग और भविष्यवाणी करना आसान हो जाता है। एल्गल जहरीले एल्गी के तेज बढ़ने से होते हैं, जो मछलियों, समुद्री जीवों और इंसानी स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं।

वहीं, ओशन कलर डेटा से पानी की क्वालिटी चेक होती है, मछली पालन, मछुआरों और तटीय लोगों को फायदा मिलता है। यह समुद्री संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने में भी मदद करता है। अमेरिकन नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन ओशन कलर प्रोडक्ट्स का पूरा सेट उपलब्ध कराता है, जो नोआ के साथ ही नासा और अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट्स से डेटा इकट्ठा करके बनाए जाते हैं। इनका इस्तेमाल पानी की गुणवत्ता जांचने और पब्लिक हेल्थ की सुरक्षा के लिए मॉनिटरिंग में होता है।

8 फरवरी 2024 को नासा ने प्लैंकटन एरोसोल क्लाउड ओशन इकोसिस्टम मिशन लॉन्च किया था। यह मिशन समुद्र और जलवायु को बेहतर समझने का नया संसाधन है। यह फाइटोप्लांकटन की डिस्ट्रीब्यूशन मापता है, जो पानी के फूड वेब को बनाए रखते हैं। साथ ही बादलों, एरोसोल और वायुमंडल-समुद्र का गहराई से अध्ययन करता है। इसके ओशन कलर इंस्ट्रूमेंट बारीक वेवलेंथ पर रोशनी मापता है। इससे अलग-अलग ग्रुप्स की पहचान आसान होती है। मिशन पहले ही इमेज और डेटा शेयर कर चुका है, जो ओशन हेल्थ, एयर क्वालिटी और क्लाइमेट चेंज के प्रभाव को बताते हैं। यह डेटा पब्लिक के लिए फ्री उपलब्ध है।

नोआ और नासा मिलकर मिशन पर काम कर रहे हैं, जो ऑपरेशनल उपयोग के लिए हैं। इनमें इकोसिस्टम इंडिकेटर्स सुधारना, ओशन मैनेजमेंट टूल्स और क्लाइमेट मॉडल्स का वेरिफिकेशन शामिल है। दोनों एजेंसियां कोस्टल पानी के कॉम्प्लेक्स कलर डेटा को सटीक बनाने की कोशिश कर रही हैं। मिशन का लक्ष्य पानी के संसाधन, आपदा प्रभाव, इकोलॉजिकल फोरकास्टिंग, हवा की क्वालिटी और स्वास्थ्य क्षेत्रों में समाज को फायदा पहुंचाना है।


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