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मेरी आत्मकथा 'द बेस्ट मिस्टेक्स ऑफ माइ लाइफ' पर महान फिल्म बनेगी : संजय खान

अभिनेता संजय खान अपनी आत्मकथा 'द बेस्ट मिस्टेक्स ऑफ माइ लाइफ' के अनावरण के लिए उत्साहित हैं जो पाठकों को उनकी फिल्मों, परिवार व वह दुर्घटना, जिसमें वह बाल-बाल बचे और अन्य घटनाओं से रूबरू कराएगी

मेरी आत्मकथा द बेस्ट मिस्टेक्स ऑफ माइ लाइफ पर महान फिल्म बनेगी : संजय खान
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मुंबई। अभिनेता संजय खान अपनी आत्मकथा 'द बेस्ट मिस्टेक्स ऑफ माइ लाइफ' के अनावरण के लिए उत्साहित हैं जो पाठकों को उनकी फिल्मों, परिवार व वह दुर्घटना, जिसमें वह बाल-बाल बचे और अन्य घटनाओं से रूबरू कराएगी। अभिनेता ने कहा कि फिल्म बनाने के लिए यह एक महान किताब है।

दिवाली से पहले रविवार को यहां शानदार समारोह में किताब का लोकार्पण किया जाएगा।

अभिनेता, निर्देशक और निर्माता संजय खान ने साक्षात्कार में बताया, "तथ्य बोलते हैं, लेकिन वे पूरी कहानी नहीं बताते। अपनी आत्मकथा बताते हुए मुझे जो प्राप्त हुआ वह लोगों को अपनी कहानी और तथ्य बताने के अतिरिक्त खुद को खोजने की एक प्रक्रिया थी।"

उन्होंने पूछा, "'क्या द बेस्ट मिस्टेक्स ऑफ माइ लाइफ' शीर्षक दिलचस्प नहीं है?"

उन्होंने कहा, "'बेस्ट मिस्टेक्स ऑफ माइ लाइफ' को आप सामान्य भाव से नहीं पढ़ सकते। इसमें मैंने अपने जीवन के अनुभवों को उतार दिया है और कुछ विशेष हिस्सों को लिखा है जो मेरी किताब के 18वें चैप्टर में हैं। यह किताब के शीर्षक का वर्णन करते हैं और पाठक को पूर्ण संतुष्टि देते हैं। यह प्रतीकात्मक है।"

संजय ने कहा कि उन्होंने अपनी सभी अभिनेत्रियों का उल्लेख किया है, जिनमें नंदा भी हैं, जिनके साथ उन्होंने 'वो दिन याद करो', 'बेटी' और 'अभिलाषा' में अभिनय किया है।

उनकी किताब में फिल्मी दुनिया के उनके दोस्तों का भी उल्लेख मिलता है।

दोस्ती के अभिनेता ने कहा, "मैं अपने प्रिय मित्र राज कपूर, धर्मेद्र, संजय कुमार और सुनील दत्त के बारे में लिखा है।"

फिल्मी दुनिया में पदार्पण के फैसले के सवाल पर दिवंगत अभिनेता फिरोज खान के भाई ने कहा, "11 वर्ष की अवस्था में मैंने 'आवारा' देखी थी। यह राज कपूर की थी।"

किताब पर कोई फिल्म बनाने की योजना के सवाल पर उन्होंने कहा, "इसमें शानदार मसाला है। इसके लिए मेरे पास और भी बहुत कुछ है जो मैंने किताब में नहीं लिखा है। वह महान जीवनी होगी।"

फिल्म के निर्देशन और वर्णन से वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अभिनय को अपना करियर बनाने का फैसला ले लिया। उन्होंने 1964 में बॉलीवुड में पदार्पण किया।

चार बच्चों- फराह, सिमोन, सुजैन और जायद के पिता संजय ने कहा कि वे अपने परिवार के आभारी हैं।


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