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स्वच्छता अभियान : सरकार से मिली राशि खर्च नहीं कर सकी निगम

 खजाने में पर्याप्त पैसा न होने के चलते जहां उत्तरी दिल्ली नगर निगम इलाके में स्वच्छता अभियान सुस्त गति से चल रहा है

नई दिल्ली। खजाने में पर्याप्त पैसा न होने के चलते जहां उत्तरी दिल्ली नगर निगम इलाके में स्वच्छता अभियान सुस्त गति से चल रहा है। वहीं, स्वच्छ भारत मिशन के तहत दिल्ली सरकार द्वारा जारी 46 करोड़ रुपए अबतक खर्च नहीं किए जा सके हैं। उक्त जानकारी बुधवार को आयोजित आमसभा की बैठक में निगमायुक्त मधुप व्यास ने सदन को दी।

वहीं, इलाके में साफ-सफाई की कमी और जरूरतमंद लोगों को निगम द्वारा 26 महीने से पेंशन भुगतान न करने पर विपक्ष ने हंगामा किया। दरअसल, नेता विपक्ष राकेश कुमार ने आरोप लगाया कि शहर में साफ-सफाई के कार्यों की बाबत अक्सर पैसा न होने की बात कही जाती है लेकिन उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत दिल्ली सरकार से प्राप्त 46 करोड़ रुपए खर्च ही नहीं किए। इसके जवाब में आयुक्त ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत मिली कुल राशि में से 6.8 प्रतिशत राशि स्वच्छता कार्यों में खर्च की जा चुकी है। जबकि शेष राशि के इस्तेमाल के लिए मैचिंग ग्रांट की व्यवस्था की जा रही है। गौरतलब है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत दी जाने वाली राशि खर्च करने के लिए संबंधित निगम को कुल खर्च की जाने वाली राशि का 65 प्रतिशत भाग अपने संसाधनों से जुटाना पड़ता है।

इससे पहले राकेश कुमार ने सदन की बैठक शुरु होते ही पिछले सदन के पटल पर प्रस्तुत 6 प्रस्तावों को बिना चर्चा के पास कराने, सदन की कार्यवाही के मिनट्स की उसी समय सम्पुष्टि करने और विपक्ष की बात सुने बिना प्रस्तावों को पास-पास करने के प्रति आपत्ति जताई। इसके साथ ही राकेश कुमार ने पार्किंग टैडर प्रक्रिया में अनुभव की शर्तों को शामिल करने और उन्हें बार-बार बदलकर पार्किंग माफिया को फायदा पहुचाने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि पार्किंग ठेका देने के लिए अनुभव की शर्त को न लादा जाए ताकि नई कंपनियां भी टेंडर प्रक्रिया में भाग ले सकें और निगम को भी ज्यादा से ज्यादा राशि के प्रस्ताव मिल सकें।



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