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मंडावा उपचुनाव में जीत पर ही टिका है रीटा चौधरी का भविष्य

राजस्थान में झुंझुनू जिले के मंडावा विधानसभा उपचुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है

मंडावा उपचुनाव में जीत पर ही टिका है रीटा चौधरी का भविष्य
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झुंझुनू । राजस्थान में झुंझुनू जिले के मंडावा विधानसभा उपचुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने अपनी सीट बरकरार रखने की चुनौती है।

मंड़ावा विधानसभा उपचुनाव के लिए सोमवार को मतदान होगा। चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है तथा प्रत्याशी घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। मंडावा सीट पर अब तक हुये चुनावों से पता चलता है कि क्षेत्र के मतदाताओं का रुझान अधिकतर कांग्रेस की तरफ ही रहता आया है। यहां से कांग्रेस के रामनारायण चौधरी छह बार विधायक रहे हैं। वर्ष 1985 में कांग्रेस की सुधा देवी विधायक रह चुकी है। वर्ष 2008 में श्री चौधरी की पुत्री रीटा चौधरी कांग्रेस से विधायक रह चुकी है।

कांग्रेस ने 2013 के विधानसभा चुनाव में तब कि मौजूदा विधायक रीटा चौधरी का टिकट काटकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ चंद्रभान को अपना प्रत्याशी बनाया था। उस चुनाव में रीटा चौधरी ने कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा था। निर्दलीय प्रत्याशी नरेंद्र कुमार खीचड़ उस चुनाव में विजय हुए थे। रीटा चौधरी दूसरे स्थान पर रही थी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा.चन्द्रभान की जमानत जब्त हो गयी थी। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर से रीटा चौधरी को अपना प्रत्याशी बनाया था। वहीं भाजपा ने निर्दलीय विधायक नरेंद्र कुमार खीचड़ को अपना प्रत्याशी बनाया था। श्री खीचड़ ने कांग्रेस की रीटा चौधरी को 2346 मतों से हरा दिया था।
श्री खीचड़ गत लोकसभा चुनाव में झुंझुनू से लोकसभा सदस्य निर्वाचित हो जाने के कारण मंडावा विधानसभा में उपचुनाव हो रहा है। इस उपचुनाव में रीटा चौधरी के सामने भाजपा ने झुंझुनू पंचायत समिति से कांग्रेस की तीसरी बार प्रधान बनी सुशीला सीगड़ा को अपना प्रत्याशी बनाया है। इस चुनाव से पूर्व दोनों ही महिला उम्मीदवार कांग्रेस पार्टी से जुड़ी रही है तथा राजनीतिक रूप से भी दोनों का जुड़ाव रहा है। दोनों एक ही जाति, एक ही बुडानिया गोत्र की बेटी है।

रीटा चौधरी 2013 और 2018 में लगातार दो बार चुनाव हार चुकी है वहीं सुशीला सीगड़ा अभी तक चार बार पंचायत राज संस्था के चुनाव लडी है एवं सभी चुनाव में जीत दर्ज करवायी है। यदि इस बार के उप चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रीटा चौधरी चुनाव हार जाती है तो उनकी हार की हैट्रिक बन जायेगी एवं आगे राजनीति करना उनके लिये मुश्किल हो जायेगा। भाजपा प्रत्याशी सुशीला सीगड़ा का यह प्रथम विधायक का चुनाव है। उनके खाते में अभी तक एक भी हार दर्ज नहीं हैं। यदि वो यह चुनाव हार भी जाती है तब भी उनके सामने राजनीति में बहुत अवसर है। उन्होने हाल ही में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। भाजपा में वो लम्बी राजनीतिक पारी खेल सकती हैं।
रीटा चौधरी के समर्थन में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट रीटा चौधरी के पिता रामनारायण चौधरी की पुण्यतिथि पर झुंझुनू में एक किसान सम्मेलन को सम्बोधित किया था। लेकिन श्री गहलोत का मंडावा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार करने नहीं जाना लोगों के गले नहीं उतर रहा है। लोगों का मानना है कि चुनाव मंडावा में हो रहें हैं जबकि मुख्यमंत्री की मिटिंग झुंझुनू में होने से मंडावा के मतदाताओं पर क्या असर पड़ेगा। श्री गहलोत एवं श्री पायलट को मंडावा क्षेत्र में जनसभा करनी चाहिये थी।

भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां लगातार जुटे रहे हैं। उसके साथ ही फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी ने दो दिनो तक मंडावा में चुनाव प्रचार किया है। केंद्र सरकार में मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, कैलाश चौधरी भी कई बार चुनाव करने के लिए आए हैं। इसके अलावा सांसद विधायक एवं बड़े नेता में लगातार प्रचार कर रहे हैं। मंडावा उपचुनाव में भाजपा के चुनाव प्रचार की कमान विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौड़ के हाथ में है। कांग्रेस के झुंझुनू से विधायक बृजेंद्र सिंह ओला, उदयपुरवाटी विधायक राजेंद्र गुढ़ा, नवलगढ़ विधायक राजकुमार शर्मा भी मंडावा से दूर ही रहे हैं। अब देखना है कि इस चुनाव में रीटा चौधरी चुनाव जीत जाती है या हार की हैट्रिक बनाती है इसका फैसला तो मंडावा के मतदाताओं के हाथ में ही हैं।


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