गरीबों के चावल में 45 फीसद कनकी,मिलरों, क्वालिटी इंस्पेक्टरों की सांठगाठ
बिलासपुर ! केन्द्र सरकार के नियमों के तहत राशन दुकानों में मिलने वाले चावल में केवल 25 प्रतिशत कनकी व और टूटा चावल होना चाहिए।

राशन दुकानों में अधिक कनकी और कचरा मिले चावल की आपूर्ति
कनकीयुक्त चावलके मामले में कभी नहीं हुई कार्रवाई
बिलासपुर ! केन्द्र सरकार के नियमों के तहत राशन दुकानों में मिलने वाले चावल में केवल 25 प्रतिशत कनकी व और टूटा चावल होना चाहिए। परंतु जिले के राशन दुकानों में 45 प्रतिशत कनकी और टूटा चावल मिला रहता है। राईस मिलर्स जब चावल खाद्य आपूर्ति निगम के गोदामों में जमा करने जाते हैं तो खाद्य आपूर्ति निगम के क्वालिटी इंस्पेक्टर द्वारा चावल की जांच कर चावल जमा लिया जाता है। लेकिन क्वालिटी इंस्पेक्टर और राईस मिलरों की मिलीभगत के कारण अधिक कनकी और टूटा चावल जमा कर क्वालिटी इंस्पेक्टर बिना चावल का जांच किए जांच रिपोर्ट बना देते हैं। शिकायत के बाद भी खाद्य निरीक्षक इसकी जांच नहीं करते। गरीब परिवारों को गुणवत्ताहीन चावल की सप्लाई खाद्य विभाग कर रहा है। मगर गरीब ये चावल खाने मजबूर हैं।
बताया जाता है कि इसके लिए राईस मिलर खाद्य विभाग और खाद्य आपूर्ति निगम में मोटी राशि देते हैं। चावल में ज्यादा कनकी और कचरा मिले होने की शिकायत कई बार खाद्य विभाग से की जा चुकी है मगर खाद्य विभाग और खाद्य आपूर्ति निगम चावल की गुणवत्ता की जांच ही नहीं करता।
‘देशबन्धु’ की टीम ने सरकारी राशन दुकानों में जाकर चावल का निरीक्षण किया गया तो चावल में कनकी व टूटे चावल की मात्रा अधिक मिली है। जबकि केन्द्र सरकार के नियम के अनुसार चावल में 25 प्रतिशत से ज्यादा कनकी व टूटा चावल नहीं होना चाहिए मगर 45 प्रतिशत कनकी व टूटा चावल की मात्रा रहती है। खाद्य आपूर्ति निगम के गोदामों में क्वालिटी इंस्पेक्टर द्वारा मिलरों से चावल जमा करने से पहले जांच की जाती है। लेकिन क्वालिटी इंस्पेक्टर अधिक कनकी और टूटे चावल की मात्रा की अनदेखी करते हैं। साबूत चावल की मात्रा बहुत कम रहती है।
बिना जांच चावल जमा
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार क्वालिटी इंस्पेक्टर बिना चावल के जांच किए गोदाम में जमा कर देते हैं। जांच रिपेार्ट में चावल की गुणवत्ता बढिय़ा बता दी जाती है। गरीबों को राशन दुकानों में कनकी, कचरायुक्त चावल मिलता है। मगर फूड इंस्पेक्टर इस पर कोई कार्रवाई नहीं करते। जबकि शासन राईस मिलर्स को हर साल करोड़ों का भुगतान धान मिलिंग के लिए करता है। टूटे चावल की मात्रा अधिक कर अच्छा चावल अनेक राईस मिल संचालक बाजार में बेच देते हैं। इस तरह राईस मिलर्स लाखों का मुनाफा कमा लेेते हैं।
भारी कमीशनखोरी
बताया जाता है कि मिलर्स खाद्य विभाग और खाद्य आपूर्ति निगम में भारी राशि देकर चावल गुणवत्तायुक्त होने की रिपोर्ट तैयार करवा लेते हैं। खाद्य इंस्पेक्टर हो या क्वालिटी इंस्पेक्टर गरीब परिवार को गुणवत्ताहीन इन्हें चावल की गुणवत्ता से कोई मतलब नहीं रहता। क्वालिटी इंस्पेक्टरों को कमीशन से मतलब रहता है। इसीलिए सरकारी चावल की गुणवत्ता आज तक ठीक नहीं हो पाई है। बताया जाता यह भी जाता है कि कमीशन का बड़ा हिस्सा उच्चाधिकारियों तक भी पहुंचता है।
शासन करता है अरबों खर्च
शासन हर साल खाद्यान्न योजना में अरबों का खर्च गरीब परिवारों के लिए करता है। मगर अच्छे चावल की सप्लाई आज तक नहीं हुई है। पूर्व में खाद्यान्न योजना में अरबों के भ्रष्टाचार का मामला उजागर हो चुका है। खाद्यान्न योजना में आज भी भ्रष्टाचार जोरों से चल रहा है। जबकि शासन ने भ्रष्टाचार रोकने योजना को ऑनलाइन भी कर दिया है। इसके बाद भी खाद्यान्न योजना में भ्रष्टाचार पर लगाम शासन नहीं लगा पाया है।
खामियाजा गरीब भुगत रहे
खाद्यान्न योजना में भ्रष्टाचार की जांच के लिए शासन ने जांच कमीशन भी बनाया है। मगर कमीशन अपनी रिपोर्ट को शासन को सौंपने में काफी विलंब कर रहा है। दोषी व्यापारी और अधिकारी अपनी कारगुजारियों को आराम से अंजाम दे रहे हैं। अरबों खर्च के बाद भी योजना का गरीबों को पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा है।
भाखनि को मिलर इसीलिए नहीं देते चावल
भारतीय खाद्य निगम राईस मिलर्स से केन्द्र सरकार के नियम के अनुसार चावल लेता है अधिक कनकी व टूटे चावल मिलने पर चावल से भरा ट्रक वापस कर दिया जाता है। इसी कारण राईस मिलर्स भारतीय खाद्य निगम को चावल की सप्लाई नहीं करना चाहते।
कड़ी कार्रवाई होगी
केन्द्र सरकार के नियम के अनुसार केवल 25 प्रतिशत ही कनकी और टूटा चावल लेना है। अगर कनकी व टूटे चावल की मात्रा अधिक है तो इसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
पुन्नूलाल मोहले
खाद्य मंत्री
चावल की होगी जांच
राशन दुकानों के चावल की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
आलोक पाण्डेय
खाद्य नियंत्रक
होगी कार्रवाई
खाद्य आपूर्ति निगम के गोदामों में चावल की जांच कराकर क्वालिटी इंस्पेक्टर पर कार्रवाई की जाएगी। क्वालिटी इंस्पेक्टर द्वारा ही चावल की गुणवत्ता की रिपोर्ट दी जाती है।
के.के.चंद्राकर
प्रबंधक
खाद्य आपूर्ति निगम


