सीवर की समस्या से मिलेगी राहत
अनधिकृत कॉलोनियां में 25.5 किमी लंबी सीवर लाइन बिछाने की परियोजना को मंजूरी

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बेहतर सीवरेज प्रबंधन के मद्देनजर जल मंत्री सौरभ भारद्वाज ने जलबोर्ड को संगम विहार के अंबेडकर नगर और देवली विधानसभा की 11 अनधिकृत कॉलोनियां में 25.5 किमी लंबी सीवर लाइन बिछाने की परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना की लागत 26.66 करोड़ रुपए है। यह प्रोजेक्ट पहले एक कंपनी को दिया गया था, लेकिन कार्य में देरी के चलते सरकार ने कंपनी का काम कैसिंल कर दिया। अब बैलेंस वर्क के लिए रिस्क एंड कॉस्ट पर नई एजेंसी को कार्य पूरा करने के लिए दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस परियोजना से इलाके करीब 3 लाख लोगों को सीवर की समस्या से राहत मिलेगी। जल मंत्री सौरभ भारद्वाज ने डीजेबी अधिकारियों को परियोजना को उम्मीदों के अनुरूप बनाने और समयसीमा के अंदर गुणवत्ता पूर्ण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए है।
जल मंत्री ने बताया कि हम यमुना को स्वच्छ बनाने और बेहतर सीवरेज प्रबंधन की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। इसी के तहत अंबेडकर नगर विधानसभा में 9 और देवली विधानसभा में 2 अनधिकृत कॉलोनियों में 25.5 किमी लंबी सीवर लाइन डाली जाएगी। क्षेत्र में सीवरेज सिस्टम उपलब्ध नहीं होने के कारण यहां से उत्पन्न सीवरेज को वर्तमान में स्थानीय तालाब, सेप्टिक टैंक या बरसाती नालों में सीवेज छोड़ा जाता है, जोकि मौजूद नाले से यमुना नदी में गिरता है।
इससे नदी के प्रदूषण स्तर में वृद्धि होती है। ऐसे में इस जल प्रदूषणकारी तत्वों को कम करने के लिए सरकार ने इलाके के हर घर को सीवेज से जोड़ने का निर्णय लिया है। यहां से निकलने वाला सीवरेज, सीवर लाइनों के माध्यम से नजदीकी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में ट्रीट के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद ट्रीटेड पानी यमुना में बहेगा।
नई एजेंसी को सौंपा जाएगा काम
संगम विहार ग्रुप आफ कॉलोनियों में 25.5 किमी लंबी इंटरनल और पेरिफेरल सीवर लाइन डाली जाएगी। 26.66 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का कार्य साल 2018 में केके सप्न नामक कंपनी को सौंपा गया था। लेकिन कंपनी द्वारा काम में करीब 5 साल की देरी की गई। ऐसे में केजरीवाल सरकार ने कंपनी का काम कैसिंल कर दिया है। अब सरकार ने कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए नई एजेंसी अपाइंट करने का फैसला लिया है। परियोजना का करीब 56 फीसद कार्य एजेंसी द्वारा किया जा चुका है। अब बाकी का कार्य रिस्क एंड कॉस्ट पर नई एजेंसी के दिया जाएगा, यानी कि इसकी रिकवरी पिछली वाली एजेंसी के बिल से ही की जाएगी।


